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Nipah Virus Alert: CDC ने Category-5 में निपाह को किया शामिल, इस श्रेणी में रखने का क्या मतलब होता है?

Nipah Virus Alert: रोग नियंत्रण केंद्र (CDC) ने निपाह वायरस को श्रेणी 5 (Category 5) की सूची में डाल दिया है। अब इसके हर संदिग्ध मामले की रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर देना अनिवार्य होगा। हालांकि ताइवान में अभी कोई मामला नहीं है, लेकिन दुनिया भर में बढ़ते खतरे को देखते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है।

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भारत

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Nidhi Yadav

Apr 04, 2026

Nipah Virus Alert

Nipah Virus Alert (Image- gemini AI)

Nipah Virus Alert: दुनिया अभी एक महामारी के असर से पूरी तरह उबरी भी नहीं थी कि एक नए वायरस ने स्वास्थ्य विभागों की नींद उड़ा दी है। ताइवान के CDC ने हाल ही में निपाह वायरस को लेकर एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। निपाह कोई नया नाम नहीं है, लेकिन इसका बदलता स्वरूप घातक बनाता है। ताइवान ने अब इसे अपनी सबसे गंभीर श्रेणी 5 की बीमारियों में शामिल कर लिया है। आइए समझते हैं कि आखिर यह श्रेणी 5 क्या है और निपाह कितना बड़ा खतरा है।

क्या है श्रेणी-5 (Nipah in Category 5)

बीमारियों को उनकी गंभीरता और फैलने की रफ्तार के हिसाब से श्रेणियों में बांटा जाता है। श्रेणी 5 (Category 5) में उन बीमारियों को रखा जाता है जो तेजी से फैलती हैं और जिनमें मृत्यु दर (Fatality Rate) बहुत ज्यादा होती है। श्रेणी 5 में शामिल होने का मतलब है कि अब किसी भी डॉक्टर या अस्पताल को निपाह का कोई भी संदिग्ध मरीज मिलने पर 24 घंटे के भीतर सरकार को सूचित करना होगा। साथ ही, ऐसे मरीजों को निगेटिव प्रेशर आइसोलेशन वार्ड में रखना अनिवार्य होगा।

श्रेणी 5 में आने वाली अन्य बीमारियां-

  • इबोला वायरस (Ebola Virus)
  • मर्स (MERS - मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम)
  • सार्स (SARS - सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम)
  • नोवेल इन्फ्लुएंजा (Naya Flu)

निपाह वायरस का क्यों है इतना खौफ?

National Library of Medicine के अनुसार निपाह एक Zoonotic वायरस है, यानी यह जानवरों से इंसानों में फैलता है। यह मुख्य रूप से 'फ्रूट बैट्स' (फलों पर रहने वाले चमगादड़) की लार या मूत्र से दूषित फल खाने से फैलता है। इसके अलावा, संक्रमित सूअरों के संपर्क में आने से भी यह फैल सकता है। ताइवान में अभी तक निपाह का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन अब तक दुनिया भर में लगभग 750 से ज्यादा लोग इसका शिकार हो चुके हैं। भारत और बांग्लादेश जैसे देशों में इसके छिटपुट मामले (Sporadic Outbreaks) देखे गए हैं। बिना किसी टीके के, केवल सतर्कता और समय पर सूचना ही इसका सबसे बड़ा बचाव है।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।