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Heat and Mental Health: क्या गर्मी में आप भी रहते हैं चिड़चिड़े और उदास! अभी जानें इसका कारण

Heat and Mental Health: The Lancet Planetary Health Journal के अनुसार, बढ़ते तापमान और 'हीट-स्ट्रेस' का सीधा संबंध हमारे मानसिक स्वास्थ्य से है। जब शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए संघर्ष करता है, तो दिमाग में 'सेरोटोनिन' (खुशी का हार्मोन) का स्तर गिर जाता है और 'कोर्टिसोल' (तनाव का हार्मोन) बढ़ जाता है।

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भारत

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Nidhi Yadav

Apr 04, 2026

Heat and Mental Health

Heat and Mental Health (Image- Gemini)

Heat and Mental Health : जैसा कि आप लोग आजकल देख ही रहे होंगे कि तापमान में गर्माहट कितनी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में अनेक ऐसी समस्याएं हैं जो गर्मी शुरू होते ही बढ़ जाती हैं। त्वचा की समस्या से लेकर मौसमी बीमारियों तक, हर समस्या अपने आप में गंभीर है। आपने कई लोगों से सुना होगा या आपके साथ भी ऐसा होता होगा कि गर्मी में आप बहुत ज्यादा चिड़चिड़े और उदास रहते हैं, वह भी बिना किसी कारण के।

इसे सामान्य समझकर टालें नहीं। कहीं न कहीं यह छोटी सी समस्या, जिसे आप आम समझकर टाल रहे हैं, आपको बड़े खतरे में डाल सकती है। आइए जानते हैं कि ऐसा किन कारणों से होता है और आप इस समस्या से कैसे बच सकते हैं?

तापमान बढ़ते ही चढ़ता है पारा (गुस्सा)

The Lancet Planetary Health Journal के अनुसार, जब तापमान बढ़ता है तो हमारा 'सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम' सक्रिय हो जाता है। इसके कारण हमारी हार्ट बीट बढ़ जाती है, बहुत तेज पसीना आने लगता है और बिना बात के ही गुस्सा आने लगता है।

सेरोटोनिन घटने से बढ़ती है उदासी

धूप और गर्मी का सीधा संबंध हमारे मूड को कंट्रोल करने वाले न्यूरोट्रांसमीटर 'सेरोटोनिन' से है। अत्यधिक गर्मी के कारण नींद पूरी नहीं होती (Insomnia), जिससे दिमाग को आराम नहीं मिलता। यही थकान धीरे-धीरे समर डिप्रेशन (Seasonal Affective Disorder) का रूप ले लेती है।

सड़क पर बढ़ता रोड रेज और गर्मी का तालमेल

आपने गौर किया होगा कि दोपहर की तपती धूप में ट्रैफिक जाम होने पर लोग जल्दी आपा खो देते हैं। रिसर्च बताती है कि तापमान में हर 1 डिग्री की बढ़ोतरी के साथ हिंसक व्यवहार और चिड़चिड़ेपन में 3% से 5% तक का इजाफा होता है। जहाँ गर्मी तेज होती है, यह व्यवहार और भी गंभीर हो सकता है।

बचाव के तरीके-

  • घर की दीवारों या पर्दों में हल्के नीले या ठंडे रंगों का प्रयोग करें।
  • गुलाब या चंदन के तेल की कुछ बूंदें रूमाल पर रखें, इनकी खुशबू गुस्से को शांत करती है।
  • चाय और कॉफी की जगह बेल का शरबत या छाछ लें।

कब गंभीर हो जाते हैं ये साइलेंट संकेत?

  • छोटी बात पर अचानक जोर से चिल्लाना।
  • निर्णय लेने में भ्रम होना।
  • भीड़भाड़ वाली जगह से अचानक घबराहट महसूस होना।

किन बीमारियों का संकेत हो सकते हैं ये लक्षण?

  • हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism)
  • इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस (Electrolyte Imbalance)
  • क्लिनिकल डिप्रेशन और एंग्जायटी (Clinical Depression)
  • कार्डियोवैस्कुलर बीमारियां (Heart Problems)
  • क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD)

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालिफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से न आजमाएं, बल्कि इस बारे में संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।