
Migraine Fasting Tips Hindi: नवरात्रि के दौरान माता के भक्त पूरे श्रद्धा भाव से नौ दिनों का उपवास रख रहे हैं। लेकिन अगर आप माइग्रेन (Migraine) की समस्या से परेशान रहते हैं, तो उपवास के दौरान आपको थोड़ी अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। अक्सर देखा जाता है कि व्रत रखते ही कुछ लोगों के सिर के एक हिस्से में तेज कसक, थपकन वाला दर्द, उल्टी जैसा मन होना या आंखों के आगे धुंधलापन महसूस होने लगता है। अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स PubMed में प्रकाशित शोध के अनुसार, लंबे समय तक भूखे रहना, शरीर में पानी की कमी होना और अचानक खान-पान का रूटीन बदलना माइग्रेन अटैक के सबसे बड़े ट्रिगर्स में से एक हैं। ऐसे में भक्ति और सेहत के बीच संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है। आइए समझते हैं कि व्रत के दौरान माइग्रेन का दर्द क्यों ट्रिगर होता है और इससे बचने के लिए आप कौन से आसान उपाय अपना सकते हैं।
National Headache Foundation (राष्ट्रीय सिरदर्द फाउंडेशन) के मुताबिक, जब हम उपवास रखते हैं, तो हमारे शरीर का सामान्य मेटाबॉलिज्म बदल जाता है। माइग्रेन के मरीजों का न्यूरोलॉजिकल सिस्टम काफी संवेदनशील होता है, इसलिए शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलाव भी सिरदर्द को न्योता दे देते हैं। लंबे समय तक कुछ न खाने से खून में ग्लूकोज का स्तर अचानक गिर जाता है। मस्तिष्क को ऊर्जा न मिलने के कारण माइग्रेन की नसें उत्तेजित हो जाती हैं। व्रत में अक्सर लोग पानी पीना भूल जाते हैं या कम पानी पीते हैं। डिहाइड्रेशन दिमाग की नसों में खिंचाव पैदा करता है, जिससे तेज सिरदर्द होने लगता है।कई लोग आम दिनों में चाय या कॉफी के आदी होते हैं। व्रत में अचानक चाय न मिलने या बहुत देर से मिलने पर भी ब्रेन केमिकल्स में बदलाव आता है। व्रत के दौरान सुबह जल्दी उठना, पूजा-पाठ और देर रात तक फलाहार करने से नींद पूरी नहीं हो पाती, जिससे माइग्रेन का खतरा और बढ़ जाता है।
अगर आप माइग्रेन की समस्या के बावजूद व्रत रख रहे हैं, तो इन सावधानियों को अपनाकर अपने दर्द को दूर रख सकते हैं;
पूरे दिन निर्जला या बिल्कुल भूखे रहने वाले कड़े व्रत से बचें। इसके बजाय थोड़ी-थोड़ी देर में फलाहार लेते रहें। मखाने, भुनी मूंगफली, नारियल का टुकड़ा या फल (जैसे केला और सेब) बीच-बीच में खाते रहें ताकि ब्लड शुगर का स्तर स्थिर बना रहे।
पानी पीने में कोई कंजूसी न करें। दिनभर में कम से कम 2.5 से 3 लीटर तरल पदार्थ लें। सादे पानी के अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ, लस्सी या खीरे का जूस पिएं। यह शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखेगा और डिहाइड्रेशन से होने वाले सिरदर्द से बचाएगा।
व्रत में अक्सर लोग कुट्टू के आटे की पूरी, पकौड़े या ज्यादा तेल-मसाले वाले आलू खाते हैं। अत्यधिक हैवी और ऑयली खाना पचने में समय लेता है और एसिडिटी पैदा करता है, जो माइग्रेन के दर्द को और तेज कर सकता है। इसकी जगह साबुदाना खिचड़ी, समा के चावल या उबले आलू का हल्का सेवन करें।
अगर आपको चाय की लत है, तो खाली पेट कड़क चाय पीने से बचें। खाली पेट चाय पीने से पेट में गैस और एसिडिटी बनती है। आप अदरक और तुलसी वाली हल्की ग्रीन टी या हर्बल टी ले सकते हैं।
रात को कम से कम 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद जरूर लें। अगर दिन में थकान या सिर भारी लगे, तो 20-30 मिनट का शॉट नैप (झपकी) ले लें। तेज धूप या बहुत ज्यादा शोर-शराबे वाली जगहों पर जाने से बचें।