Nipah Virus High Alert: 19 साल बाद लौटे जानलेवा निपाह वायरस का कहर रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। भारत से शुरू होने के बाद वियतनाम, थाईलैंड और मलेशिया के हाई अलर्ट के बाद अब चीन, अमेरिका (USA) और पाकिस्तान ने भी ग्लोबल अलर्ट जारी कर दिया है।
Nipah Virus High Alert: भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में 19 साल बाद लौटे निपाह वायरस ने अब ज्यादातर देशों में डर का माहौल बना रखा है। इस वायरस के खतरनाक प्रकोप को देखते हुए कुछ देशों में हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग भी शुरू हुई थी। लेकिन हाल ही की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन (UK) और चीन जैसे विकसित देशों ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। कोरोना काल की तरह एक बार फिर से थर्मल स्क्रीनिंग और स्कैनिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि, WHO का बयान यह भी आया था कि व्यापार रोकने की आवश्यकता नहीं है। आइए जानते हैं कि अब और किन देशों ने हाई अलर्ट जारी किया है और निपाह वायरस का 19 साल बाद लौटना कितना घातक हो सकता है।
निपाह वायरस इतना खतरनाक है कि 10 में से हर 7 लोगों की इसके कारण मृत्यु होने की आशंका रहती है, क्योंकि इसकी मृत्यु दर ही बहुत ज्यादा है। इसके अलावा यह वायरस एक-दूसरे के संपर्क से बहुत ज्यादा फैलता है और इसी कारण से इसे कोरोना का भाई बताया जा रहा है।
निपाह का ग्लोबल अलर्ट जारी दुनिया भर में निपाह का अलर्ट इतना अधिक बढ़ गया है कि WHO के बयान के बाद भी देशों में इसका अलर्ट बढ़ता ही जा रहा है। विकासशील देशों की तो बात मान भी ली जाए कि स्वास्थ्य सुविधाओं के चलते वे पहले ही सतर्क हो रहे हैं, लेकिन अब बहुत बड़े और विकसित देशों में भी इसको लेकर हाई अलर्ट लगातार बढ़ रहा है।
1.पाकिस्तान- बॉर्डर हेल्थ सर्विसेज ने सभी प्रवेश द्वारों (एयरपोर्ट, बंदरगाह और जमीनी सीमाओं) पर थर्मल स्क्रीनिंग अनिवार्य कर दी है। यात्रियों को अपनी पिछले 21 दिनों की ट्रैवल हिस्ट्री देनी होगी ताकि यह पता चल सके कि वे प्रभावित क्षेत्रों से तो नहीं आए हैं।
2.चीन, अमेरिका और ब्रिटेन (China, US, UK)- इन देशों ने भी इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स पर सतर्कता बढ़ा दी है। संदिग्ध लक्षण वाले यात्रियों को तुरंत क्वारंटीन करने की व्यवस्था की गई है।
3.अन्य देश- थाईलैंड, सिंगापुर, हॉन्गकॉन्ग, मलेशिया और इंडोनेशिया ने भी अपने एयरपोर्ट्स पर स्क्रीनिंग को बेहद सख्त कर दिया है।
इस खतरनाक वायरस की शुरुआत भारत के पश्चिम बंगाल में 19 साल के बाद हुई थी। यह एक जूनोटिक बीमारी है। भारत के पड़ोसी देशों के बाद अन्य विकसित देशों ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। इसके खतरे को देखते हुए अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्लोबल अलर्ट जारी हो चुका है।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालिफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।