
दर्द से पीड़ित महिला की प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- chatgtp)
Anxiety and Chronic Pain: अगर आपको लंबे समय से शरीर में दर्द बना रहता है और दवाइयों के बाद भी आराम नहीं मिल रहा, तो इसकी वजह सिर्फ शरीर की बीमारी नहीं, बल्कि दिमाग से जुड़ी समस्या भी हो सकती है। नई मेडिकल रिपोर्ट में सामने आया है कि ADHD यानी अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर के लक्षण पुराने दर्द को और ज्यादा गंभीर बना सकते हैं।
EMJ Reviews में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक जिन लोगों में ADHD के लक्षण ज्यादा थे, उनमें क्रॉनिक पेन यानी लंबे समय तक रहने वाला दर्द काफी ज्यादा गंभीर पाया गया।
ADHD एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति को ध्यान लगाने में परेशानी, बेचैनी, जल्दी गुस्सा आना और दिमाग का लगातार एक्टिव रहना जैसी समस्याएं होती हैं। इसे अक्सर बच्चों की बीमारी माना जाता है, लेकिन कई वयस्क भी इससे प्रभावित होते हैं।
जापान के मल्टीडिसिप्लिनरी पेन सेंटर्स में 958 लोगों पर यह स्टडी की गई। ये सभी ऐसे मरीज थे जिन्हें लंबे समय से दर्द की समस्या थी और सामान्य इलाज से राहत नहीं मिल रही थी। EMJ Reviews रिसर्च में पाया गया कि जिन मरीजों में ADHD के लक्षण थे, उनमें दर्द की तीव्रता ज्यादा थी। खासतौर पर जिन लोगों ने दर्द का स्तर 9 या 10 बताया, उनमें लगभग 27% लोग ADHD के लक्षणों से भी जूझ रहे थे।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि ADHD वाले लोगों में चिंता (Anxiety), डिप्रेशन और हर बात को लेकर ज्यादा डर या तनाव महसूस करने की आदत दर्द को और बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब दिमाग लगातार तनाव में रहता है, तो शरीर दर्द को ज्यादा महसूस करने लगता है। यही वजह है कि कुछ लोगों को मामूली दर्द भी बहुत ज्यादा तकलीफदेह लगता है।
न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अनाइता हेगड़े ने एक पॉडकास्ट में बताया कि अगर किसी मरीज को लंबे समय से दर्द हो और इलाज के बाद भी आराम न मिले, तो उसकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति की जांच भी जरूरी है। नई रिपोर्ट बताती है कि सिर्फ दर्द की दवा देना काफी नहीं है। मरीज की मानसिक सेहत, तनाव, चिंता और ADHD जैसे लक्षणों को समझना भी जरूरी है।
डॉ. हेगड़े ने बताया कि अगर समय रहते ADHD और मानसिक तनाव को कंट्रोल किया जाए, तो पुराने दर्द की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। हालांकि डॉक्टर सलाह देते हैं कि किसी भी तरह के लगातार दर्द को हल्के में न लें और खुद से दवाइयां खाने के बजाय विशेषज्ञ से जांच जरूर करवाएं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
11 May 2026 04:18 pm
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