स्वास्थ्य

कूल्हे के फ्रैक्चर वाले बुजुर्गों में डिमेंशिया की आशंका ज्यादा

हाल ही हुए एक सर्वे में शोधकर्ताओं ने निकाला निष्कर्ष
2 min read
• •
Updated: 17 Jul 2020, 12:35 PM IST
कूल्हे के फ्रैक्चर वाले बुजुर्गों में डिमेंशिया की आशंका ज्यादा
कूल्हे के फ्रैक्चर वाले बुजुर्गों में डिमेंशिया की आशंका ज्यादा

क्या बुजुर्गों में कूल्हे का फ्रैक्चर उनके लिए अज्ल़ाइमर होने का संकेत है? लेकिन हाल ही शोधकर्ताओं ने एक शोध के निष्कर्ष स्वरूप ऐसा होने की आशंका है। शोध में अध्ययनकर्ताओं ने कहा कि कूल्हे की सर्जरी के लिए अस्पताल में भर्ती होने वाले अधिकतर बुजुर्गों में अल्जाइमर के विकास के जैविक संकेत दिखाई देते हैं। हैरानी की बात है कि अध्ययन में शमिल किसी भी बुजुर्ग ने डिमेंशिया के लिए नैदानिक संकेत नहीं दिए। यह इस बात का संकेत है कि बुजुर्गों में संतुलन खराब करने वाला दिमागी परिवर्तन हिप-फ्रैक्चरिंग फॉल्स और अल्जाइमर दोनों का खतरा बढा़ सकता है। यह भी हो सकता है कि हिप फ्रैक्चर अपने आप में मनोभ्रंस का पहला संकेत हो।

अमरीका के जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय (John Hopkins University) में मेमोरी एंड अल्जाइमर ट्रीटमेंट सेंटर की ओर से किए गए इस शोध अध्ययन में यह नहीं बताया गया है कि हिप फ्रैक्चर वाले प्रत्येक बुजुर्ग को अल्जाइमर है या हो सकता है। लेकिन शोध के निष्कर्ष के आधार पर चिकित्सकों ने यह सुझाव दिया है कि संतुलन बिगडऩे से कूल्हे में आई चोट की सर्जरी का सामना करने वाले लोगों को ऑपरेशन के बाद अल्जाइमर या अन्य मानसिक समस्या हो सकती हैं। इसलिए उन पर बारीकी से निगरानी रखनी चाहिए। क्योंकि ऐसे कुछ बुजुर्गों में अल्जाइमर के लक्षण भी नजर आ सकते हैं। शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन पांच सालों के दौरान 82 साल की औसत आयु वाले 200 से ज्यादा हिप फ्रैक्चर वाले बुजुर्ग रोगियों पर किया था।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Published on: