स्वास्थ्य

पीरियड्स में परेशानी? डिलीवरी के बाद बढ़ सकता है डिप्रेशन का खतरा

Pregnancy and mental health : एक नए शोध के अनुसार, पीरियड्स (Periods) से एक-दो हफ्ते पहले होने वाली परेशानियों वाली महिलाओं (Premenstrual syndrome) को प्रसव के बाद डिप्रेशन (Depression) होने का खतरा ज्यादा रहता है।
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Apr 01, 2024
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PMS a Warning Sign? Study Finds Link to Postpartum Depression

Pregnancy and mental health : एक नए अध्ययन में पाया गया है कि जिन महिलाओं को पीरियड्स से एक-दो हफ्ते पहले प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (PMS) के लक्षण होते हैं, उनमें प्रेगनेंसी (Pregnancy) के बाद डिप्रेशन होने का खतरा ज्यादा होता है।

पीरियड्स से पहले होने वाले शारीरिक और मानसिक परेशानियों को प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (Premenstrual syndrome) कहते हैं। इस रिसर्च में पाया गया है कि पीएमएस वाली महिलाओं को प्रेगनेंसी (Pregnancy) के बाद डिप्रेशन होने का खतरा 5 गुना ज्यादा होता है।

इसी तरह, रिसर्च में ये भी पता चला है कि प्रेगनेंसी के दौरान डिप्रेशन में रहने वाली महिलाओं में पीरियड्स के आसपास शारीरिक और मानसिक परेशानी होने का खतरा भी दोगुना होता है।

इस रिसर्च में स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने साल 2001 से 2018 के बीच के डाटा का अध्ययन किया. उन्होंने पाया कि जिन 85,000 महिलाओं को प्रेगनेंसी (Pregnancy) के आसपास डिप्रेशन हुआ था, उनमें से 3% को प्रेगनेंसी से पहले पीएमएस की समस्या थी। जबकि जिन 8,50,000 महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान डिप्रेशन नहीं हुआ था, उनमें से सिर्फ 0.6% को पीएमएस की समस्या थी।


अध्ययन के मुख्य लेखक डॉ. डोंगहाओ लू का कहना है कि "ये जरूरी है कि गर्भवती महिलाओं का इलाज करने वाले डॉक्टरों को प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (Premenstrual syndrome) और प्रेगनेंसी (Pregnancy) के आसपास डिप्रेशन के बीच के संबंध के बारे में पता हो, ताकि वे महिलाओं को सही सलाह दे सकें."

वैज्ञानिकों ने ये भी पाया कि ये दोनों परेशानियां चाहे प्रेगनेंसी (Pregnancy) से पहले हों या बाद में, दोनों ही स्थितियों में ये रिश्ता देखा गया। साथ ही ये भी पाया गया कि जिन महिलाओं को पहले कभी मानसिक रोग नहीं हुआ था, उनमें भी ये रिश्ता देखा गया।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
01 Apr 2024 12:51 pm
Published on:
01 Apr 2024 12:48 pm