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दही खाने से Heart Attack आता है! अभी जानें विशेषज्ञ के इस दावे का पूरा सच

Heart Attack Cause: दही को हम सब बड़ा फायदेमंद मानते हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि गलत तरीके से खाया गया दही आपकी नसों को चोक कर सकता है? जानिए दही और हार्ट अटैक का क्या कनेक्शन है।

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भारत

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Nidhi Yadav

May 02, 2026

Heart Attack Cause

Heart Attack Cause (Image- gemini)

Heart Attack Cause: हम बचपन से सुनते आए हैं कि दही खाओ, सेहत बनेगी। लेकिन आजकल लोग पूछ रहे हैं कि क्या दही खाने से भी हार्ट अटैक आ सकता है? जवाब है, हां, आ सकता है, लेकिन तब जब आप उसे गलत तरीके से खाएं। असल में दही खुद बुरा नहीं है, बुरा है उसमें छिपा गाढ़ा फैट। आइए डॉक्टर परमेश्वर अरोरा (आयुर्वेद विशेषज्ञ) से जानते हैं कि कैसे दही खाने से हार्ट अटैक आता है?

क्या दही सच में दिल का दुश्मन है?

हमारे यहां दही को अमृत माना जाता है। कोई भी शुभ काम हो, तो दही-चीनी खाकर बाहर निकलते हैं। लेकिन आजकल डॉक्टरों और सोशल मीडिया पर एक नई चर्चा शुरू हुई है कि क्या दही खाने से भी हार्ट अटैक आ सकता है? सुनने में यह थोड़ा अजीब लगता है कि जो चीज़ पेट को ठंडा रखती है, वो दिल की धड़कन कैसे रोक सकती है? दही खुद बुरा नहीं है, लेकिन जो चिकनाई (Fat) दही में होती है और जिस गलत तरीके से हम इसे खाते हैं, वो असली विलेन है।
विशेषज्ञ का कहना है कि अगर आप बहुत ज्यादा शारीरिक श्रम नहीं करते, तो आपको दही बिल्कुल भी नहीं खाना चाहिए।

दही कैसे हार्ट अटैक का कारण बनता है?

हम मलाई वाला एकदम गाढ़ा दही रोज खाने लगे हैं। आजकल बाजार में जो पैकेट वाला गाढ़ा दही मिलता है या जो हम घर में फुल क्रीम दूध से दही जमाते हैं, उसमें सैचुरेटेड फैट होता है। यह गाढ़ा फैट हमारे खून की नसों (Arteries) में जाकर चिपकने लगता है। इसे मेडिकल की भाषा में कोलेस्ट्रॉल कहते हैं। जब नसों में यह कचरा बढ़ जाता है, तो दिल तक खून पहुंचना मुश्किल हो जाता है और यही हार्ट अटैक की सबसे बड़ी वजह बनती है।

कौनसी गलतियों से बढ़ता है खतरा?

  • बिना मेहनत के दही खाना।
  • नमक डालकर दही खाना।
  • दही-बड़े, दही-पकौड़ी या पराठों के साथ दही खाना।
  • रात को दही खाना।

दही खाने का सही तरीका?

  • मलाई हटाकर दही जमाएं।
  • दही की जगह छाछ पीएं।
  • दोपहर के समय खाएं।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।