स्वास्थ्य

Rotovac vaccine : भारत की स्वदेशी Rotovac वैक्सीन ने किया कमाल, 54% तक कर सकती है बचाव

Rotavirus vaccine India : भारत की स्वदेशी रोटावैक (Rotovac) वैक्सीन ने असली दुनिया के अध्ययन में 54% प्रभावशीलता दिखाई है। डॉ. गगनदीप कांग के नेतृत्व में हुए इस शोध ने साबित किया कि यह वैक्सीन बच्चों को रोटावायरस-जनित दस्त से प्रभावी सुरक्षा देती है।
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Updated: 20 Oct 2025, 9:28 AM IST
Rotovac vaccine effectiveness
Rotovac vaccine effectiveness : (फोटो सोर्स: AI image@Gemini)

Rotavirus vaccine India : हाल ही में रोटावैक (Rotavac) वैक्सीन को लेकर आई एक बड़ी खबर ने भारत के स्वास्थ्य जगत में उत्साह भर दिया है। यह खबर इसलिए खास है, क्योंकि यह वैक्सीन भारत के सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) का एक अहम हिस्सा है और छोटे बच्चों को जानलेवा रोटावायरस-जनित गैस्ट्रोएंटेराइटिस (गंभीर दस्त) से सुरक्षा देती है।

क्लिनिकल ट्रायल से 'असली दुनिया' तक

वैक्सीन के फेज III ट्रायल की प्रमुख जांचकर्ता रही डॉ. गगनदीप कांग ने हाल ही में हुए एक अध्ययन के नतीजों पर खुशी जाहिर की है। इस अध्ययन में यह पुष्टि हुई है कि रोटावैक की प्रभावशीलता (Effectiveness) 54% है। यह आंकड़ा उतना ही है, जितना इसके क्लिनिकल ट्रायल में पाया गया था!

डॉ. कांग ने बताया कि क्लिनिकल ट्रायल एक नियंत्रित माहौल में स्वस्थ प्रतिभागियों पर किए जाते हैं। लेकिन असली दुनिया, जहां कुपोषण और अपूर्ण टीकाकरण जैसी चुनौतियां हैं, वहां भी टीके का वैसा ही प्रदर्शन करना असाधारण सफलता है।

हमारे लिए सबसे बड़ी बात यह नहीं थी कि ट्रायल सफल रहा, बल्कि यह थी कि ट्रायल के बाहर, रोजमर्रा की जिंदगी में यह टीका कितना असरदार है। जब हमने देखा कि जिन बच्चों को दस्त के कारण अस्पताल में भर्ती किया गया है, उनमें से ज्यादातर ऐसे हैं, जिन्होंने टीका नहीं लगवाया था तो यह साफ हो गया कि यह टीका अपना काम बखूबी कर रहा है।”
– डॉ. गगनदीप कांग

वर्तमान में बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन में वैश्विक स्वास्थ्य टीम का नेतृत्व कर रही डॉ. कांग ने बताया कि जहाँ नैदानिक ​​परीक्षणों में स्वस्थ प्रतिभागियों की सावधानीपूर्वक निगरानी की जाती है, वहीं कुपोषण और अपूर्ण टीकाकरण जैसे कारकों के कारण वास्तविक दुनिया में इसकी प्रभावशीलता भिन्न हो सकती है। उन्होंने कहा, एक सफल परीक्षण अद्भुत है, लेकिन परीक्षण के बाहर की परिस्थितियों में इसका प्रदर्शन महत्वपूर्ण है।"

सरकार द्वारा टीके का व्यापक वितरण शुरू करने के बाद किए गए हालिया परीक्षण-नकारात्मक अध्ययन में 4,000 से ज़्यादा बच्चों का विश्लेषण किया गया—जो 200 प्रतिभागियों वाले तीसरे चरण के परीक्षण से कहीं ज़्यादा था—और परीक्षण के परिणामों से मेल खाते हुए 54% प्रभावशीलता की पुष्टि की गई। डॉ. कांग ने आगे कहा, "अगर दस्त से पीड़ित अस्पताल में भर्ती ज़्यादा बच्चों को टीका नहीं लगाया गया है, तो यह साबित करता है कि टीका काम कर रहा है।"

रोटोवैक के कारण इंटससेप्शन होने की पूर्व चिंताओं का समाधान करते हुए, उन्होंने कहा, "हमने एक सुरक्षा अध्ययन किया था जिसमें इसका कोई सबूत नहीं था, और बाद के आंकड़ों ने पुष्टि की कि यह कोई दुष्प्रभाव नहीं है।"

भारत की वैक्सीन, वैश्विक पहचान

भारत के लिए रोटोवैक के महत्व पर, डॉ. कांग ने कहा, "यह दर्शाता है कि रोटोवैक किसी भी अंतरराष्ट्रीय टीके जितना ही अच्छा है। भारत रोटावायरस टीकाकरण के मामले में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, जो 2019 तक पूरे देश में लागू हो गया था और सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) के तहत इसे मुफ़्त में उपलब्ध कराया जा रहा था। लगभग 90% लक्षित आबादी का टीकाकरण हो रहा है, लेकिन हमें शेष 10% तक पहुँचना होगा।"

यूआईपी: हर बच्चे का सुरक्षा कवच

उन्होंने समानता को बढ़ावा देने में यूआईपी की भूमिका पर ज़ोर दिया: "हर बच्चे को सुरक्षा का अधिकार है। निजी क्षेत्र के टीके कुछ ही बच्चों तक पहुंच पाते हैं, लेकिन केवल यूआईपी ही यह सुनिश्चित करता है कि सभी बच्चे इसके दायरे में आएँ।" 1986 में खसरे की शुरुआत के बाद से, भारत ने यूआईपी में कई टीके जोड़े हैं, जिनमें रोटावायरस, न्यूमोकोकल और इंजेक्शन द्वारा पोलियो के टीके शामिल हैं। एचपीवी और टाइफाइड के टीकों को मंज़ूरी मिल चुकी है और ये समान सुरक्षा को और बढ़ा सकते हैं।

टीकाकरण के प्रति संशय की चुनौती पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. कांग ने साक्ष्य और आलोचनात्मक सोच पर भरोसा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, "हमें जो हम जानते हैं और जो नहीं जानते, उसके बारे में पारदर्शी होकर विज्ञान में विश्वास पैदा करना होगा। उन्होंने लोगों को "गलत सूचनाओं के तूफान" के बीच विश्वसनीय स्रोतों की तलाश करने और वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

रोटोवैक अध्ययन न केवल टीके की सुरक्षा और प्रभावकारिता को पुष्ट करता है, बल्कि पूरे भारत में टीकाकरण कार्यक्रमों में समान पहुँच और जनता के विश्वास के महत्व को भी रेखांकित करता है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
Updated on:
20 Oct 2025, 9:28 AM IST
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