अधिक उम्र में घुटनों के खराब होने की मुख्य वजह आर्थराइटिस है। घुटनों के जोड़ खराब होने पर डॉक्टर नी रिप्लेसमेंट की सलाह देते हैं।
अधिक उम्र में घुटनों के खराब होने की मुख्य वजह आर्थराइटिस है। घुटनों के जोड़ खराब होने पर डॉक्टर नी रिप्लेसमेंट की सलाह देते हैं। नी रिप्लेसमेंट से पहले पीआरपी यानी प्लेट्लेट्स रिच प्लाज्मा थैरेपी भी अपना सकते हैं। कई फायदे हैं इसके
क्या होती है पीआरपी
पीआरपी में मरीज के खून से प्लाज्मा निकालकर मशीन से बढ़ाया जाता है। फिर उसे घुटनों में सुई से लगाते हैं। इस प्रक्रिया में 2-3 घंटे का समय लगता है। इसमें मरीज को भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ती है। इससे धीरे-धीरे आराम मिलता है। घुटनों में कार्टिलेज दोबारा से बनने लगता है। जिससे दर्द कम होता है। यह उन मरीजों में अधिक कारगर है जिनमें किसी बीमारी या मेडिकल कंडीशन में घुटनों की सर्जरी नहीं हो सकती है।
कम उम्र के मरीजों में पीआरपी से अधिक लाभ
आर्थराइटिस की शुरुआती स्टेज में पीआरपी का उपयोग ज्यादा कारगर है। इससे लंबे समय तक आराम मिलता है। टेंडन या लिगामेंट इंजरी में पीआरपी उपयोगी है। लेकिन पूरी तरह से टूट चुके टेंडन या लिगामेंट्स में सर्जरी की ही जरूरत पड़ती है। एथलीट या स्पोट्र्स पर्सन के घुटनों की मांसपेशियों में खिंचाव आने पर दवाओं और फिजियोथैरेपी के साथ पीआरपी थैरेपी देते हैं तो ज्यादा तेजी से आराम मिलता है। पीआरपी थैरेपी हर उम्र के लोगों में की जा सकती है। लेकिन कम उम्र के मरीजों में लाभ अधिक होता है।