Anorexia Nervosa: एनोरेक्सिया नर्वोसा एक तरह का ‘ईटिंग डिसऑर्डर’ है। इस दौरान लोगों को वजन बढ़ने का इतना अधिक डर रहता है कि वो खाना खाना ही बहुत कम कर देते हैं और उनका वजन बहुत कम हो जाता है।
New Delhi: एनोरेक्सिया एक तरह की खाने की बीमारी है। यह एक अस्थायी समस्या है, इसमें लोगों को भूख बहुत कम लगती है। जब भूख की यह कमी ईटिंग डिसऑर्डर में बदल जाता है तो इसे हम एनोरेक्सिया नर्वोसा कहते हैं। इस बीमारी में शरीर का वजन बढ़ने का अधिक खतरा बना रहता है। यह पुरुषों और महिलाओं दोनों में देखा जा सकता है। ऐसे में लोग इससे बचने के लिए अत्यधिक डाइटिंग और व्यायाम का सहारा लेने लगते हैं। क्योंकि लोगों को इस बात का डर लगता है की अगर वो भोजन का सेवन करेंगे तो मोटे हो जाएंगे। जिसके कारण उनके खान-पान का समय अव्यवस्थित हो जाता है। खाने का अनियमित और कम सेवन से उनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। लाइफस्टाइल में बदलाव और सही इलाज की मदद से एनोरेक्सिया का उपचार किया जा सकता है।आइए इसके बारे में बिस्तार से जानते हैं।
एनोरेक्सिया नर्वोसा के प्रमुख लक्षण और कारण
एनोरेक्सिया नर्वोसा के लक्षण शारीरिक और व्यवहारिक दोनों हो सकते हैं। आइए जानते हैं इसके कुछ सामान्य लक्षणों के बारे में:-
एनोरेक्सिया नर्वोसा के कारण
इस तरह के बीमारी का मुख्य कारण क्या हो सकता है ये बात अभी तक ठीक तरह से स्पष्ट नहीं हो पाया है। लेकिन ऐसा माना जाता है कि यह अन्य बीमारियों के तरह ही लोगों को बहुत नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि इनके लिए अनुवांशिकता और हार्मोनल बदलावों को जिम्मेदार ठहराया जाता है। इसके अलावा, हमारे आस पास का माहौल भी इस मनोविकार के पीछे जिम्मेदार हो सकता है। जैसे कई बार लोग लोग अधिक पतला होने की कोशिश में एनोरेक्सिया की चपेट में आ जाते हैं। लड़कियों और महिलाओं में भूख लगने पर भी भोजन नहीं करना व भोजन बिल्कुल ना के बराबर करना एनोरेक्सिया के मनोवैज्ञानिक लक्षण हो सकते हैं।
एनोरेक्सिया नर्वोसा के उपचार
एनोरेक्सिया नर्वोसा का इलाज दो तरीकों से किया जाता है। पहला, आप इसके लिए डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। डॉक्टर आपको दवाईयों और थेरेपी की सलाह देगा। दूसरा, आप अपने जीवनशैली में कुछ बदलाव कर के इस बीमारी के जोखिमों को कम कर सकते हैं।
लाइफस्टाइल में जरुरी बदलाव