गर्भावस्था की पहली व दूसरी तिमाही में शिशु के अंगों का निर्माण व विकास होता है। वहीं अंतिम तिमाही में बच्चे का वजन बढ़ता है और उसे आयरन की ज्यादा जरूरत होती है। इसलिए महिला को हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, मेथी, बथुआ), दालें, अंकुरित अनाज खाने की सलाह देते हैं। इन बातों पर ध्यान दें-
12 घंटे में 10 बार गर्भस्थ शिशु का मूवमेंट होना सामान्य है। कम या ज्यादा होने पर ध्यान दें। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. राखी आर्य के बताया कि गर्भावस्था एक ऐसी अवस्था है जिसमें हर छोटी से छोटी बातों पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
इन पर ध्यान दें
अंतिम के तीन माह में पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द और यूरिन संबंधी परेशानी भी होती हैं। जानते हैं इनके बारे में-
बीपी बढऩा : सिरदर्द, देखने में दिक्कत, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द होने के साथ यूरिन कम पास होता है तो ब्लड प्रेशर बढ़ता है। इससे हार्ट अटैक की आशंका बढ़ती है। इस दौरान तुरंत बीपी को कंट्रोल करना जरूरी होता है।
थकान : शरीर मेें यदि खून की कमी होती है तो अत्यधिक थकान के अलावा सुस्ती महसूस होती है। ऐसे में खून की जांच कराकर इलाज लेना चाहिए।
ब्लीडिंग : थोड़ी भी ब्लीडिंग और दर्द के साथ पानी के जैसा पतला तरल आए तो इसे नजरअंदाज न करें। तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
शिशु के मूवमेंट पर गौर करें : गर्भावस्था के दौरान अंतिम तिमाही में गर्भस्थ शिशु की गतिविधि पर गौर करना जरूरी होता है। 12 घंटे में लगभग 10 बार बच्चे का मूवमेंट होना जरूरी है। गर्भवती को विशेष ध्यान देना चाहिए।
ध्यान रखें
प्रेग्नेंसी में शुरू की पहली तिमाही की तरह ही अंतिम तिमाही में भी कब्ज की समस्या रहती है। फाइबर वाली चीजें लें। खूब पानी पीएं। ९वें माह में दस्त प्रसव का अप्रत्यक्ष लक्षण होता है।
सतर्कता बरतें
अक्सर प्रसव के लक्षणों से अनजान होने के कारण दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में कमर के निचले हिस्से से होते हुए दर्द यदि आगे की तरफ पेट के निचले हिस्से और जांघ में आए तो सतर्कता बरतनी चाहिए। ध्यान रखें दर्द रुक-रुक कर आता है।