स्वास्थ्य

चेन्नई के डॉक्टरों ने सर्जरी करके रोकी ‘कान में होने वाली सनसनी’

दुनिया में ऐसे 50 से भी कम मामले।चिकि त्सकों का दावा है कि देश में यह पहला मामला है, जिसका इलाज माइक्रोवैस्कुलर डिकम्प्रेशन सर्जरी से किया गया है।
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Updated: 10 Apr 2021, 11:23 AM IST
चेन्नई के डॉक्टरों ने सर्जरी करके रोकी 'कान में होने वाली सनसनी'
चेन्नई के डॉक्टरों ने सर्जरी करके रोकी 'कान में होने वाली सनसनी'

चेन्नई। तमिलनाडु में चेन्नई के एमजीएम हेल्थकेयर के चिकित्सकों ने एक दुर्लभ सर्जरी कर एक 26 वर्षीय युवक को रिंगिंग सेंसेशन (सनसनी बजना) से राहत दी है। यह टिनिटस का एक दुर्लभ रूप है। चिकित्सकों का दावा है कि देश में यह पहला मामला है, जिसका इलाज माइक्रोवैस्कुलर डिकम्प्रेशन सर्जरी से किया गया है। दुनिया भर में ऐसे 50 से भी कम मामले दर्ज किए गए हैं।

लगातार होती है सनसनाहट-
टिनिटस स्वास्थ्य की एक ऐसी स्थिति है, जिसमें रोगी लगातार अपने कान में बजने की सनसनी महसूस करता है। भले ही बाहर कोई शोर न हो। कई बार यह किसी छिपे हुए रोग का भी लक्षण होता है। माइक्रोवैस्कुलर डिकम्प्रेशन सर्जरी का उपयोग ट्रिगेमिनल न्यूरोलजिया (नस दबने के कारण चेहरे के ऊपर दर्द जैसा झटका) के इलाज के लिए नियमित रूप से किया जाता है।

रोगी नहीं कर पाता था काम पर फोकस-
रोगी, 2019 से बाएं कान में इस समस्या से पीडि़त था। कान में महसूस होते शोर से उसे सोने में दिक्कत होती थी। साथ ही वह अपनी दैनिक गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता था। भारत में इस तरह का यह पहला मामला है। हॉस्पिटल में आने के बाद उसके ब्रेन का एमआरआइ किया गया। इसमें कोई असामान्य ट्यूमर या वैस्कुलर मालफार्मेशन नहीं दिखा था।

श्रवण तंत्रिका का धमनी से सटना वजह -
डॉ. के श्रीधर ने बताया कि विस्तृत जांच के बाद यह सामने आया कि इस समस्या का कारण श्रवण तंत्रिका का धमनी से सट गया होना है। इसके बाद कर्णावर्ती तंत्रिका की माइक्रोवैस्कुलर डिकम्प्रेशन सर्जरी की गई। इसके जरिए आर्टरी को नर्व से अलग किया गया। उन्होंने कहा कि इस सर्जरी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यदि इसे ठीक से नहीं किया गया तो रोगी बहरा हो सकता है। इसमें फेसियल वीकनेस की स्थिति भी बन सकती है।

डिस्क्लेमर
इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ओपिनियन का विकल्प नहीं है। पाठकों को सलाह दी जाती है कि वे कोई भी दवा, उपचार या नुस्खा अपनी मर्जी से ना आजमाएं। इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
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