Typhoid Outbreak in India: भारत के कई शहरों में टाइफाइड तेजी से फैल रहा है। दूषित पानी इसकी सबसे बड़ी वजह है। जानें टाइफाइड के लक्षण, कारण, इलाज और बचाव के आसान उपाय।
Typhoid Outbreak in India: भारत के कई बड़े शहरों में इन दिनों टाइफाइड तेजी से फैल रहा है। गुजरात के गांधीनगर, उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा और तेलंगाना के हैदराबाद जैसे इलाकों से लगातार मामले सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों और स्वास्थ्य एजेंसियों के अनुसार, इसकी सबसे बड़ी वजह पीने के पानी का दूषित होना है। कई जगहों पर सीवेज का पानी पीने की लाइन में मिल गया है, जिससे लोग बीमार पड़ रहे हैं।
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गांधीनगर में जांच के दौरान पता चला कि नई बिछाई गई पानी की पाइपलाइन में जगह-जगह लीकेज है। इन लीकेज की वजह से गंदा पानी साफ पानी में मिल गया, जिससे टाइफाइड के दर्जनों मामले सामने आए। हालात की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी इस मामले पर संज्ञान लिया है। ग्रेटर नोएडा में भी कई सेक्टरों के लोगों ने गंदा पानी पीने के बाद बुखार, पेट दर्द और कमजोरी की शिकायत की। वहीं हैदराबाद में कुछ इलाकों के पानी में फीकल कोलिफॉर्म बैक्टीरिया की मात्रा ज्यादा पाई गई है, जो सीवेज प्रदूषण का संकेत है।
टाइफाइड एक गंभीर बैक्टीरियल बीमारी है, जो Salmonella Typhi नाम के बैक्टीरिया से होती है। यह गंदे पानी और दूषित खाने के जरिए शरीर में प्रवेश करता है। जहां साफ पानी और स्वच्छता की कमी होती है, वहां टाइफाइड का खतरा ज्यादा रहता है।
डॉ संदीप जोशी के अनुसार टाइफाइड के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 6 से 30 दिन बाद दिखते हैं। इनमें लगातार तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, उलटी, पेट दर्द, दस्त या कब्ज शामिल हैं। समय पर इलाज न हो तो आंत में छेद या खून में संक्रमण जैसी गंभीर दिक्कतें भी हो सकती हैं।
डॉ संदीप जोशी (चिकित्सा अधिकारी) MD फिजिशियन के अनुसार टाइफाइड का इलाज एंटीबायोटिक से संभव है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि अब कई मामलों में दवाओं का असर कम हो रहा है। एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है, इसलिए बचाव सबसे जरूरी है।