
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo - Gemini AI
Stomach Cancer AKA Gastric Carcinoma : पेट का कैंसर भारत में चुपचाप लोगों को मार रहा है। 'Gastroenterology, Hepatology and Endoscopy Practice' (2024) में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर इस बीमारी के बारे में कई बातें बताई हैं। भारत में पेट के कैंसर के मामलों में निरंतर वृद्धि देखने को मिल रही है। नेशनल कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (NCRP) और अन्य स्वास्थ्य डेटा पर जरा गौर करें-
कैंसर विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौजूदा ट्रेंड जारी रहा, तो अगले कुछ वर्षों में इसमें 12% तक की और वृद्धि हो सकती है। अभी भी ये दूसरा ऐसा कैंसर है जो भारतीय को साइलेंटली मारने का काम कर रहा है।
भारत के अलग-अलग हिस्सों में खान-पान और जीवनशैली के कारण पेट के कैंसर का खतरा अलग-अलग है। दक्षिण और उत्तर-पूर्वी भारत में इसके मामले अधिक देखे जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक नमक, मिर्च-मसाले, प्रोसेस्ड मीट और 'हेलिकोबैक्टर पाइलोरी' (H. pylori) बैक्टीरिया का संक्रमण इसके मुख्य कारण हैं। इसके अलावा शराब, सिगरेट आदि भी इसके कारण हैं।
भारत में पुरुषों में होने वाले कैंसरों में पेट का कैंसर 5वें स्थान पर है। वहीं, कैंसर से होने वाली मौतों के मामले में यह दूसरा सबसे बड़ा कारण बना हुआ है। साल 2022 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में पेट के कैंसर से लगभग 57,727 लोगों की मृत्यु हुई। चीन और जापान के बाद भारत उन देशों में शामिल है जहां पेट के कैंसर के सबसे अधिक मामले और मौतें दर्ज की जाती हैं।
भारत में पेट के कैंसर की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके 80% से अधिक मामले 'एडवांस्ड स्टेज' (तीसरी या चौथी स्टेज) में पकड़े जाते हैं। शुरुआती लक्षण को अधिकतर लोग सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
सलाह- पेट के कैंसर के लक्षण सामान्य होते हैं। अगर समय पर जांच कराए तो पता चलने के बाद इलाज किया जा सकता है। देरी से पता चलने के कारण ही सर्वाइवल रेट कम है।
Published on:
04 Mar 2026 04:41 pm
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