
High Triglycerides: ट्राइग्लिसराइड्स खून में फैट के रूप में होते हैं। ये शरीर में ऊर्जा के रूप में काम करते हैं। हमारा खानपान हमारा शरीर अतिरिक्त कैलोरी को ट्राइग्लिसराइड्स के रूप में संग्रहित करता है। ऐसे में जब ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा सामान्य से अधिक हो जाती है तो यह हमारे दिल और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में आज हम जानेंगे की हाई ट्राइग्लिसराइड्स क्या होते हैं, इसके कारण क्या हो सकते हैं और इससे बचने के उपाय क्या हैं।
ट्राइग्लिसराइड्स वह फैट होते हैं जो हमारे रक्त में पाए जाते हैं। जब हम अधिक कैलोरी लेते हैं, तो शरीर इसे ट्राइग्लिसराइड्स के रूप में संग्रहित करता है। हालांकि, यदि ये ट्राइग्लिसराइड्स की मात्रा अधिक हो जाए तो यह दिल और रक्त वाहिकाओं के लिए खतरनाक हो सकता है। इसका स्तर यदि 150 mg/dL से अधिक हो, तो इसे उच्च ट्राइग्लिसराइड्स माना जाता है, जो हृदय रोग, स्ट्रोक और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
संतुलित और स्वस्थ आहार: संतुलित आहार का सेवन ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड, जैसे मछली, अखरोट और बीज, को अपने आहार में शामिल करें। साथ ही, रिफाइंड शक्कर और वसायुक्त आहार से बचें।
शराब का सेवन कम करें: अधिक शराब पीने से ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ सकता है। यदि आप शराब पीते हैं, तो इसे सीमित मात्रा में ही लें।
वजन घटाएं: अधिक वजन ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को बढ़ा सकता है। नियमित व्यायाम और सही आहार के साथ वजन घटाने से ट्राइग्लिसराइड्स नियंत्रित हो सकते हैं।
नियमित व्यायाम करें: व्यायाम से शरीर में अतिरिक्त वसा घटती है और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर कम होता है। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम शारीरिक गतिविधि करें, जैसे चलना, दौड़ना या तैराकी।
फाइबर का सेवन बढ़ाएं: फाइबर से भरपूर आहार ट्राइग्लिसराइड्स को नियंत्रित करने में मदद करता है। दलहन, साबुत अनाज, फल और सब्जियाँ फाइबर के अच्छे स्रोत हैं।
तंबाकू से बचें: तंबाकू का सेवन न केवल आपके दिल के लिए नुकसानदायक है, बल्कि यह ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को भी बढ़ा सकता है। तंबाकू से पूरी तरह बचें।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।