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Indoor Air Pollution Health Risk: क्यों एलपीजी की कमी बढ़ा सकती है फेफड़ों की बीमारियां? डॉक्टरों की चेतावनी

Indoor Air Pollution Health Risk: अगर घर में खाना लकड़ी, कोयले या बायोमास ईंधन से बनता है तो यह फेफड़ों के लिए खतरनाक हो सकता है। जानिए इनडोर एयर पॉल्यूशन से होने वाली बीमारियां और बचाव के तरीके।

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भारत

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Dimple Yadav

Mar 12, 2026

Indoor Air Pollution Health Risk

Indoor Air Pollution Health Risk (Photo- gemini ai)

Indoor Air Pollution Health Risk: आज के समय में एलपीजी (LPG) गैस ने खाना बनाना काफी आसान और सुरक्षित बना दिया है। पहले बहुत से घरों में खाना बनाने के लिए लकड़ी, कोयला या फसल के अवशेष जैसे पारंपरिक ईंधन का इस्तेमाल किया जाता था। इनसे बहुत ज्यादा धुआं निकलता था, जिससे घर के अंदर हवा प्रदूषित हो जाती थी और लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ता था।

पिछले कुछ सालों में एलपीजी की पहुंच बढ़ने से करोड़ों परिवारों को साफ ईंधन मिला है और इनडोर एयर पॉल्यूशन यानी घर के अंदर के धुएं से होने वाली बीमारियां कम हुई हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी वजह से एलपीजी की कमी हो जाती है और लोग फिर से लकड़ी या कोयले जैसे ईंधन पर लौट आते हैं, तो इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।

पारंपरिक ईंधन क्यों होते हैं खतरनाक?

लकड़ी, कोयला या कंडे जैसे ईंधन पूरी तरह नहीं जलते। इस वजह से इनमें अधूरा दहन (Incomplete Combustion) होता है और इससे कई खतरनाक गैसें और कण हवा में फैल जाते हैं। इनमें शामिल हैं:

  • PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण
  • कार्बन मोनोऑक्साइड
  • नाइट्रोजन ऑक्साइड

पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन

जब ये कण घर के अंदर जमा हो जाते हैं और लोग लंबे समय तक इन्हें सांस के जरिए अंदर लेते हैं, तो ये फेफड़ों और खून तक पहुंच सकते हैं। इससे धीरे-धीरे शरीर को गंभीर नुकसान होने लगता है।

फेफड़ों की बीमारी का खतरा

विशेषज्ञों के मुताबिक, बायोमास के धुएं का सीधा संबंध कई गंभीर सांस संबंधी बीमारियों से है। इनमें सबसे खतरनाक बीमारी सीओपीडी (Chronic Obstructive Pulmonary Disease) है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें फेफड़ों की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम हो जाती है और सांस लेने में परेशानी होने लगती है।

धुएं के छोटे-छोटे कण फेफड़ों में जाकर सूजन पैदा करते हैं और धीरे-धीरे फेफड़ों के टिश्यू को नुकसान पहुंचाते हैं। इसके कारण ये लक्षण दिखाई दे सकते हैं:

  • लगातार खांसी
  • सांस फूलना
  • सीने में घरघराहट
  • बार-बार छाती में संक्रमण

इसके अलावा बायोमास के धुएं से इन बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है:

  • अस्थमा
  • क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस
  • बार-बार फेफड़ों का संक्रमण
  • फेफड़ों का कैंसर

महिलाओं और बच्चों को ज्यादा खतरा

घर के अंदर के धुएं का असर सभी पर पड़ता है, लेकिन महिलाओं और बच्चों पर इसका असर सबसे ज्यादा होता है। क्योंकि महिलाएं अक्सर रसोई में ज्यादा समय बिताती हैं, इसलिए वे धुएं के सीधे संपर्क में रहती हैं। लंबे समय तक ऐसा धुआं सांस के जरिए अंदर जाने से फेफड़ों की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों के लिए यह और भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है। छोटे बच्चों के फेफड़े अभी पूरी तरह विकसित नहीं होते, इसलिए प्रदूषित हवा का असर उनकी सेहत पर लंबे समय तक पड़ सकता है।

ऐसे बच्चों में अक्सर ये समस्याएं देखी जाती हैं:

  • निमोनिया
  • अस्थमा के दौरे
  • फेफड़ों का सही से विकास न होना
  • बार-बार सांस का संक्रमण

जोखिम को कैसे कम करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि घर के अंदर के धुएं से बचना बहुत जरूरी है। इसके लिए कुछ आसान कदम अपनाए जा सकते हैं। खाना बनाने के लिए एलपीजी जैसे साफ ईंधन का इस्तेमाल करें। रसोई में खिड़की, चिमनी या एग्जॉस्ट फैन लगाएं। लोगों को इनडोर एयर पॉल्यूशन के खतरों के बारे में जागरूक करें। साफ ईंधन का इस्तेमाल सिर्फ खाना बनाने को आसान नहीं बनाता, बल्कि परिवार के फेफड़ों और पूरे स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में भी मदद करता है।