बवासीर की समस्या कई लोगो को होती है परन्तु कोई इस बारे में ज्यादा बात भी नहीं करता है। लोग इस समस्या के बारे में एक दूसरे से राय भी नही लेते हैं। आज के इस आर्टिकल में हम आपको इसी विषय में पूरी जानकारी देने जा रहे हैं।
नई दिल्ली। इसमें एनस के अंदर और बाहर तथा रेक्टम के निचले हिस्से में सूजन आ जाती है। इसकी वजह से एनस के अन्दर और बाहर, या किसी एक जगह पर मस्से बन जाते हैं। मस्से कभी अन्दर रहते हैं, तो कभी बाहर आ जाते हैं। करीब 60 फीसदी लोगों को उम्र के किसी न किसी पड़ाव में बवासीर की समस्या होती है। रोगी को सही समय पर पाइल्स का इलाज कराना बेहद ज़रूरी होता है।
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यह एक अनुवांशिक समस्या भी है। यदि परिवार में किसी को यह समस्या रही हो, तो इससे दूसरे व्यक्ति को होने की आशंका रहती है। बहुत पुराना होने पर यह फिस्टुला का रूप धारण कर लेता है जिसे फिस्टुला भी कहते हैं।
लक्षण
एनस के आस-पास कठोर गांठ जैसी महसूस होती है। इसमें दर्द रहता है, तथा खून भी आ सकता है।
शौच के बाद भी पेट साफ ना हेने का आभास होना।
शौच के वक्त जलन के साथ लाल चमकदार खून का आना।
शौच के वक्त अत्यधिक पीड़ा होना।
कारण
कुछ व्यक्तियों को अपने रोजगार की वजह से घंटे खड़े रहना पड़ता है, जैसे- बस कंडक्टर, ट्रॉफिक पुलिस इत्यादि। इसके साथ ही जिन्हें भारी वजन उठाना पड़ता है। इन लोगों को बवासीर से पीड़ित होने की अधिक संभावना रहती है।
अधिक तला एवं मिर्च-मसाले युक्त भोजन करना। शौच ठीक से ना होना। फाइबर युक्त भोजन का सेवन न करना। महिलाओं में प्रसव के दौरान गुदा क्षेत्र पर दबाव पड़ने से बवासीर होने का खतरा रहता है।
उपाय
बादी बवासीर में दर्द और जलन होने पर जीरे के दानों को पानी के साथ पीसकर लेप बना लें। इसे मस्सों वाली जगह पर लगाएं।
नींबू के रस में अदरक और शहद मिलाकर सेवन करें। इससे पाइल्स में फायदा पहुँचता है।
अगर आप पाइल्स का इलाज करवा करें हैं या बवासीर से पीड़ित हैं तो इन चीजों का परहेज करना बहुत जरूरी है—
जंक-फूड
तला-भुना एवं मिर्च-मसाले युक्त भोजन का सेवन बिल्कुल न करें।
जैतून के तेल में सूजन ठीक करने वाले गुण होते हैं। यह रक्तवाहिकाओं में आई सूजन को कम करता है। जैतून के तेल को बादी बवासीर के मस्सों पर लगाएं।