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ECMO Treatment: फेफड़े पूरी तरह हो चुके थे फेल, फिर कैसे मौत के मुंह से लौट आए डॉक्टर ? जानिए क्या है वो ईसीएमओ तकनीक

ECMO Machine: हार्ट फेल होने और फेफड़ों के पूरी तरह खराब होने जैसी गंभीर स्थिति में ECMO कैसे मरीजों की जान बचाता है? जानिए 3 रियल केस और इस मशीन का काम।

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भारत

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Dimple Yadav

May 21, 2026

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ECMO मशीन को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- chatgtp)

What is Ecmo Machine: आजकल गंभीर हार्ट और फेफड़ों की बीमारियों में एक खास तकनीक तेजी से चर्चा में है, जिसका नाम है ईसीएमओ । कई लोग इसे आखिरी उम्मीद वाली मशीन भी कहते हैं। हाल ही में सामने आए तीन अलग-अलग मामलों में ईसीएमओ (ECMO) ने मरीजों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई

आखिर क्या होता है ईसीएमओ ?

क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट के मुताबिक ईसीएमओ का पूरा नाम एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनेशन (Extracorporeal Membrane Oxygenation) है। आसान भाषा में समझें तो यह एक ऐसी मशीन है जो कुछ समय के लिए दिल और फेफड़ों का काम संभालती है। जब मरीज के फेफड़े शरीर को ऑक्सीजन नहीं दे पाते या दिल सही तरह से खून पंप नहीं कर पाता, तब ईसीएमओ का इस्तेमाल किया जाता है। इस मशीन में शरीर से खून बाहर निकालकर उसमें ऑक्सीजन मिलाई जाती है और फिर उसे वापस शरीर में भेजा जाता है। इससे दिल और फेफड़ों को आराम और रिकवरी का समय मिल जाता है।

केस 1: हार्ट सर्जरी के बाद बच्चों का दिल पड़ गया कमजोर

एक रिपोर्ट के अनुसार, दो छोटे बच्चों की जटिल हार्ट सर्जरी हुई थी। ऑपरेशन सफल रहा, लेकिन बाद में उनका दिल खुद से ठीक तरह काम नहीं कर पा रहा था। ऐसे में डॉक्टरों ने करीब 110 घंटे तक ईसीएमओ सपोर्ट दिया। इस दौरान ईसीएमओ मशीन ने बच्चों के दिल और फेफड़ों का काम संभाला, जिससे उनके शरीर में ऑक्सीजन और ब्लड सर्कुलेशन बना रहा। धीरे-धीरे दिल की स्थिति सुधरी और दोनों बच्चों को ईसीएमओ से हटाया जा सका।

केस 2: 55 साल के डॉक्टर के फेफड़ों ने पूरी तरह काम करना बंद कर दिया

दूसरे मामले में एक 55 वर्षीय डॉक्टर को गंभीर सांस की तकलीफ, इंफेक्शन और सेप्टिक शॉक हो गया था। हालत इतनी बिगड़ गई कि उनके फेफड़े लगभग पूरी तरह काम करना बंद कर चुके थे। वेंटिलेटर से भी फायदा नहीं मिलने पर डॉक्टरों ने ईसीएमओ शुरू किया। यहां ईसीएमओ ने कृत्रिम फेफड़े की तरह काम किया। मशीन ने खून में ऑक्सीजन पहुंचाई और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकाली। कई हफ्तों तक चले इलाज के बाद उनके फेफड़े धीरे-धीरे रिकवर हुए और वे सामान्य जीवन में लौट सके।

केस 3: 14 साल की बच्ची को अल्ट्रा-रैपिड वीवी-ईसीएमओ से बचाया गया

तीसरे मामले में 14 साल की एक बच्ची को गंभीर निमोनिया और सेप्टिक शॉक था। उसके फेफड़े शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं दे पा रहे थे। डॉक्टरों ने तेजी से वीवी-ईसीएमओ (VV-ECMO) शुरू किया। वीवी-ईसीएमओ खासतौर पर तब इस्तेमाल होता है जब फेफड़े फेल हो रहे हों लेकिन दिल काम कर रहा हो। इस मशीन ने बच्ची के फेफड़ों को आराम दिया और शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाने का काम संभाला। करीब 8 दिन बाद उसकी हालत सुधरने लगी।

कब पड़ती है ईसीएमओ की जरूरत?

क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट के मुताबिक ईसीएमओ का इस्तेमाल तब किया जाता है जब:

  • फेफड़े गंभीर रूप से फेल हो जाएं
  • हार्ट सर्जरी के बाद दिल कमजोर पड़ जाए
  • गंभीर निमोनिया या संक्रमण हो
  • वेंटिलेटर से फायदा न मिल रहा हो
  • शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बहुत कम हो जाए

हालांकि ईसीएमओ कोई बीमारी ठीक नहीं करता, लेकिन यह शरीर को समय देता है ताकि इलाज असर कर सके और अंग रिकवर हो सकें।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।