
गर्भ में पल रहे शिशु और जेनेटिक बदलावों को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- chatgtp)
Miscarriage Risk Factors: अक्सर लोगों को लगता है कि मिसकैरेज सिर्फ तब होता है जब महिला की सेहत खराब हो या वह प्रेगनेंसी में लापरवाही करे। लेकिन सच इससे काफी अलग है। कई बार पूरी तरह स्वस्थ और फिट महिलाओं में भी गर्भपात हो जाता है। अब वैज्ञानिकों ने इसकी एक नई वजह खोजी है, जो माता-पिता के जीन से जुड़ी हुई है।
जर्नल Nature में प्रकाशित हुई स्टडी में हाल ही में वैज्ञानिकों ने करीब 1.4 लाख IVF एम्ब्रायो (भ्रूण) के जेनेटिक डेटा का अध्ययन किया। इस दौरान उन्होंने पाया कि कई भ्रूणों में क्रोमोसोम की संख्या सामान्य नहीं थी। इस स्थिति को एनेयूप्लॉइडी कहा जाता है। आसान भाषा में समझें तो शरीर की कोशिकाओं में क्रोमोसोम ज्यादा या कम हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में भ्रूण सही तरीके से विकसित नहीं हो पाता और प्रेगनेंसी शुरुआती महीनों में खत्म हो सकती है।
रिसर्च के अनुसार, पहली और दूसरी तिमाही में होने वाले करीब आधे मिसकैरेज क्रोमोसोम की गड़बड़ी से जुड़े होते हैं। इसका मतलब है कि भ्रूण में शुरुआत से ही ऐसी जेनेटिक समस्या मौजूद होती है, जिससे उसका विकास रुक जाता है।
बढ़ती उम्र में महिलाओं में मिसकैरेज का खतरा ज्यादा हो जाता है। नई रिसर्च ने भी इस बात की पुष्टि की है। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि सिर्फ उम्र ही नहीं, बल्कि कुछ खास जीन भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।
रिसर्च में SMC1B नाम के एक खास जीन की पहचान की गई। यह जीन अंडाणु बनने के दौरान क्रोमोसोम को सही तरीके से जोड़कर रखने का काम करता है। अगर इस जीन में बदलाव हो जाए तो क्रोमोसोम सही तरीके से अलग नहीं हो पाते। इससे भ्रूण में गड़बड़ी होने लगती है और मिसकैरेज का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा C14orf39, CCNB1IP1 और RNF212 जैसे कुछ अन्य जीन भी इस प्रक्रिया से जुड़े पाए गए हैं।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, महिलाओं में अंडाणु बनने की प्रक्रिया तब शुरू हो जाती है जब वे खुद अपनी मां के गर्भ में होती हैं। इसके बाद यह प्रक्रिया कई सालों तक रुकी रहती है और बाद में ओव्यूलेशन के समय दोबारा शुरू होती है। इसी लंबे अंतराल में क्रोमोसोम से जुड़ी गड़बड़ी होने की संभावना बढ़ सकती है।
हर मिसकैरेज के पीछे सिर्फ जेनेटिक कारण नहीं होते। बढ़ती उम्र, तनाव, खराब लाइफस्टाइल, धूम्रपान, प्रदूषण और कुछ स्वास्थ्य समस्याएं भी इसकी वजह बन सकती हैं। लेकिन यह नई रिसर्च भविष्य में बेहतर फर्टिलिटी ट्रीटमेंट और प्रेगनेंसी केयर को समझने में काफी मददगार साबित हो सकती है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
21 May 2026 11:09 am
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