
पत्ती पर टिक कीट- प्रतीकात्मक तस्वीर (Source- Freepik)
Tick Borne Disease Cause: आजकल बदलते मौसम और ग्लोबल वार्मिंग के कारण कई ऐसी बीमारियां सामने आ रही हैं, जिनकी तरफ हमारा ध्यान पहले कम ही जाता था। ऐसी ही एक चिंता बढ़ाने वाली रिपोर्ट मेडिकल जगत की सबसे प्रतिष्ठित जर्नल 'The New England Journal of Medicine' (NEJM) ने जारी की है।
इस रिपोर्ट में चिचड़ी और पिस्सू जैसे छोटे कीड़ों के काटने से होने वाली बीमारियों के बढ़ते रूप के बारे में बताया गया है। जब यह रिपोर्ट पूरी दुनिया को चेता रही है, तो सवाल उठता है कि क्या भारत में भी इसका खतरा बढ़ रहा है? आइए, डॉ. राहुल यादव (फिजिशियन) की पत्रिका से विशेष बातचीत से जानते हैं कि यह बीमारी क्या है और हम इससे कैसे बच सकते हैं।
टिक असल में छोटे-छोटे परजीवी होते हैं, जिसे हम किलनी, चिचड़ी या पिस्सू कहते हैं। ये आमतौर पर कुत्तों, गायों, भैंसों जैसे दुधारू जानवरों या झाड़ियों-घास फूस में पाए जाते हैं। जब ये कीड़े किसी संक्रमित जानवर को काटने के बाद इंसान को काटते हैं, तो उनके शरीर के बैक्टीरिया, वायरस या पैरासाइट इंसान के खून में चले जाते हैं।
इस तरह यह बीमारी तेजी से फैलती है। भारत में कांगो फीवर (CCHF) और क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज (KFD) जैसी बीमारियां इसी कैटेगरी में आती हैं।
टिक के काटने का तुरंत पता नहीं चलता क्योंकि जब यह काटता है, तो इसकी लार में एक प्राकृतिक सुन्न करने वाला तत्व होता है। इसके कारण इंसान को दर्द या खुजली महसूस नहीं होती और यह कीड़ा कई दिनों तक शरीर से चिपककर खून चूसता रहता है, जिससे संक्रमण पूरी तरह शरीर में फैल जाता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
21 May 2026 10:10 am
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