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हार्ट अटैक के बाद रुकी धड़कन, फिर भी 10 दिन तक रहा जीवित! डॉक्टर से जानें चीन के इस केस का विज्ञान

Heart Attack Survival Story: चीन में एक 40 साल के आदमी का हार्ट अटैक के बाद दिल धड़कना बंद हो गया था, लेकिन डॉक्टरों ने हार नहीं मानी। उन्होंने उसे 10 दिनों तक एक मशीन (ECMO) पर रखा, जिसने उसके शरीर में खून का दौरा जारी रखा। नतीजा यह हुआ कि 20 दिन बाद वह शख्स मौत के मुंह से बाहर निकलकर, अपने पैरों पर चलते हुए घर गया।

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भारत

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Nidhi Yadav

Apr 30, 2026

Heart Attack Survival Story

Heart Attack Survival Story (Image- gemini)

Heart Attack Survival Story: कहानी शुरू होती है चीन के एक अस्पताल से, जहां एक 40 साल के व्यक्ति को बेहद गंभीर हालत में लाया गया। उसे इतना जोरदार हार्ट अटैक आया था कि अस्पताल पहुंचते-पहुंचते उसकी धड़कनें रुक गईं। डॉक्टरों ने उसे बचाने के लिए वो सब कुछ किया जो वे कर सकते थे। सीने को दबाया, बिजली के झटके दिए, दवाइयां दीं, लेकिन दिल था कि धड़कने का नाम ही नहीं ले रहा था।

ऐसी स्थिति में अक्सर उम्मीद छोड़ दी जाती है, क्योंकि अगर दिमाग और अंगों तक खून न पहुंचे, तो इंसान चंद मिनटों में दम तोड़ देता है। लेकिन यहां डॉक्टरों ने एक बड़ा रिस्क लिया और ECMO नाम की तकनीक का इस्तेमाल किया। आइए डॉक्टर राहुल यादव( फिजिशियन) से जानते हैं कि ECMO क्या है?

क्या है ये ECMO?

अब आप सोच रहे होंगे कि ये ECMO क्या बला है? इसे आप आसान शब्दों में शरीर के बाहर रखा नकली दिल और फेफड़ा कह सकते हैं। जब इंसान का अपना दिल काम करना बंद कर देता है, तो यह मशीन शरीर का सारा गंदा खून बाहर खींच लेती है, उसमें ऑक्सीजन मिलाती है और फिर उसे वापस शरीर में पंप कर देती है। इस मरीज के साथ भी यही हुआ। उसका असली दिल सो चुका था, लेकिन इस मशीन ने 10 दिनों तक उसके शरीर के बाकी अंगों को जिंदा रखा। यह बिल्कुल वैसा ही था जैसे गाड़ी का इंजन खराब हो जाए और उसे टो (tow) करके मंज़िल तक पहुंचाया जाए।

10 दिन के बाद कैसे धड़का दिल

मरीज पूरे 10 दिनों तक इस मशीन के सहारे अस्पताल के बिस्तर पर पड़ा रहा। डॉक्टर इंतज़ार कर रहे थे कि कब उसका दिल खुद से धड़कना शुरू करे। और आखिरकार वही हुआ! धीरे-धीरे उसके दिल की मांसपेशियों ने काम करना शुरू किया। 10वें दिन जब डॉक्टरों को यकीन हो गया कि अब दिल खुद का बोझ उठा सकता है, तो मशीन हटा ली गई। करीब 20 दिनों तक चले इस लंबे संघर्ष के बाद, वह आदमी न सिर्फ होश में आया, बल्कि पूरी तरह ठीक हो गया। जब वह अस्पताल से डिस्चार्ज हुआ, तो वह किसी स्ट्रेचर पर नहीं, बल्कि खुद चलकर बाहर निकला।

सेहत के लिए क्या सबक है?

40 साल की उम्र में हार्ट अटैक आना बताता है कि हमें अपनी लाइफस्टाइल पर ध्यान देना होगा। आज की मेडिकल साइंस मौत के दरवाजे से भी वापस ला सकती है, बशर्ते मरीज को सही समय पर बड़े सेंटर पहुंचाया जाए।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।