
Heart Attack with Normal Reports (Photo- chatgtp)
Heart Attack with Normal Reports: आजकल हम अक्सर सुनते हैं कि कल ही तो उनका चेकअप हुआ था, सब नॉर्मल था, फिर अचानक हार्ट अटैक कैसे आ गया? यह सवाल न केवल डरावना है, बल्कि मेडिकल साइंस के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। ज्यादातर लोग ईसीजी (ECG) या टीएमटी (TMT) रिपोर्ट 'नॉर्मल' आने पर खुद को सुरक्षित मान लेते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का दावा है कि ये रिपोर्टें आपको एक झूठी सुरक्षा (False Security) का एहसास करा सकती हैं।
हार्ट अटैक का असली विलेन अक्सर वो 90% वाला ब्लॉकेज नहीं होता जो टेस्ट में आसानी से दिख जाता है, बल्कि वह 'सॉफ्ट प्लाक' होता है जो केवल 30% से 50% तक ही नस को ब्लॉक करता है। American College of Cardiology की एक रिसर्च के मुताबिक, लगभग 50% हार्ट अटैक उन नसों में होते हैं जिनमें ब्लॉकेज 50% से भी कम था। इसे 'वल्नरेबल प्लाक' (Vulnerable Plaque) भी कहा जाता है। चूंकि यह ब्लॉकेज कम होता है, इसलिए खून का बहाव सामान्य बना रहता है और ईसीजी या स्ट्रेस टेस्ट में कोई गड़बड़ी नहीं आती। लेकिन जब यह 'सॉफ्ट प्लाक' अचानक फट (Rupture) जाता है, तो वहां तुरंत खून का थक्का (Clot) जम जाता है और नस 100% ब्लॉक हो जाती है। यही कारण है कि 'ऑल क्लियर' रिपोर्ट वाला व्यक्ति भी अचानक अटैक का शिकार हो जाता है।
कार्डियोलॉजिस्ट्स का मानना है कि मेडिकल रिपोर्ट्स सिर्फ उस पल की स्थिति बताती हैं, भविष्य की गारंटी नहीं देतीं। डॉ. संदीप व्यास (सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट) के अनुसार "ईसीजी और टीएमटी टेस्ट केवल तभी गड़बड़ी दिखाते हैं जब ब्लॉकेज 70% से ज्यादा हो। 'सॉफ्ट प्लाक' एक टाइम बम की तरह है जो किसी भी समय तनाव, प्रदूषण या खराब जीवनशैली के कारण फट सकता है। अगर आपको सीने में हल्का भारीपन, सांस फूलना या जबड़े में दर्द महसूस हो, तो भले ही आपकी रिपोर्ट नॉर्मल हो, इसे मामूली समझकर इग्नोर न करें।"
एक अन्य रिसर्च में ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन के शोधकर्ताओं ने बताया कि फिट दिखने वाले लोगों में अक्सर 'साइलेंट इन्फ्लेमेशन' (Silent Inflammation) की वजह से अटैक आता है, जो रूटीन चेकअप में कभी सामने नहीं आता।
अगर आपकी रिपोर्ट नॉर्मल है लेकिन आपकी लाइफस्टाइल तनावपूर्ण है, तो आपको एडवांस टेस्ट्स पर विचार करना चाहिए:
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
25 Apr 2026 05:26 pm
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