
पीरियड के दौरान दर्द से जूझती महिला को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- freepik)
Period Pain Relief: हर महीने पीरियड्स के दौरान होने वाला दर्द लाखों महिलाओं की दिनचर्या को प्रभावित करता है। ऐसे में सबसे आम सवाल होता है कि दर्द से राहत पाने के लिए Hot Water Bag का इस्तेमाल करें या Ice Pack का? सोशल मीडिया पर दोनों तरीकों के समर्थक मिल जाएंगे, लेकिन वैज्ञानिक रिसर्च क्या कहती है?
अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स (ACOG) के अनुसार पीरियड्स का दर्द मुख्य रूप से गर्भाशय में बनने वाले प्रॉस्टाग्लैंडिन नामक रसायनों के कारण होता है। ये रसायन गर्भाशय की मांसपेशियों को सिकोड़ते हैं, जिससे ऐंठन और दर्द महसूस होता है।
2018 में जर्नल Scientific Reports में प्रकाशित एक व्यवस्थित समीक्षा (Systematic Review) में छह क्लीनिकल ट्रायल्स का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि हीट थेरेपी यानी गर्माहट देने वाले पैड, हॉट वॉटर बैग या हीट पैच पीरियड्स के दर्द को कम करने में प्रभावी साबित हुए। कुछ अध्ययनों में हीट पैच का असर दर्द निवारक दवाओं के बराबर या उनसे बेहतर भी पाया गया। रिसर्च के अनुसार गर्माहट पेट और पेल्विक हिस्से की मांसपेशियों को रिलैक्स करती है, रक्त प्रवाह बढ़ाती है और ऐंठन कम करने में मदद करती है। यही वजह है कि डॉक्टर अक्सर पीरियड्स के दर्द में गर्म सिकाई की सलाह देते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि Ice Pack पर उतनी मजबूत वैज्ञानिक रिसर्च उपलब्ध नहीं है जितनी Heat Therapy पर। हालांकि कुछ महिलाओं को ठंडक से राहत महसूस होती है, खासकर तब जब दर्द के साथ सूजन, गर्मी महसूस होना या एंडोमेट्रियोसिस जैसी समस्याएं जुड़ी हों। कई महिलाओं ने अपने अनुभवों में बताया है कि Ice Pack दर्द की तीव्रता कम करने में मदद करता है, लेकिन यह व्यक्तिगत प्रतिक्रिया हो सकती है।
यदि सामान्य पीरियड क्रैम्प्स हैं, तो मौजूदा वैज्ञानिक साक्ष्य Hot Water Bag या Heat Therapy के पक्ष में ज्यादा मजबूत हैं। यह तरीका दर्द कम करने के लिए सबसे अधिक अध्ययन किया गया और प्रभावी पाया गया है। वहीं यदि गर्म सिकाई से राहत नहीं मिलती, दर्द बढ़ जाता है या शरीर में ज्यादा गर्मी महसूस होती है, तो सीमित समय के लिए Ice Pack आजमा सकती हैं। लेकिन बर्फ को सीधे त्वचा पर लगाने से बचें।
ACOG के मुताबिक यदि दर्द इतना ज्यादा हो कि स्कूल, कॉलेज, ऑफिस या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, या हर महीने दर्द बढ़ता जा रहा हो, तो यह एंडोमेट्रियोसिस, फाइब्रॉइड्स या किसी अन्य स्त्री रोग का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
Published on:
14 Jun 2026 11:14 am
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