What is PM10: को रेस्पायरेबल पर्टिकुलेट मैटर कहा जाता है और इन कणों का आकार 10 माइक्रोमीटर होता है। PM10 की मात्रा 100 होने पर ही हवा को सांस लेने के लिए सुरक्षित माना जाता है। वहीं इनकी मौजूदगी इस स्तर से बढ़ी हो तो इसे खतरनाक माना जाता है। PM10 का हवा में स्तर बढ़ने का सबसे बुरा असर बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है।
नई दिल्ली। What is PM10: दिल्ली शहर की हवा जहरीली होने का कारण वायु में पार्टिकुलेट मैटर (PM) के स्तर में वृद्धि होना है। दिल्ली की हवा में PM10 का स्तर लगातार बढ़ने से हवा प्रदूषित हो रही है। PM10 यह एक तरह से पार्टिकल पॉल्यूशन है। ये ठोस और तरल रूप में हवा में मौजूद रहता है। ये PM2.5 से ज्यादा जानलेवा है, क्योंकि ये हवा में ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देते हैं। PM10 को पर्टिकुलेट मैटर कहते हैं। इन कणों का साइज 10 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास होता है। इसमें धूल, गर्दा और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं। PM10 की मात्रा 100 होने की स्थिति सांस लेने के लिए सुरक्षित मानते है। पीएम 10 धूल, कंस्ट्रक्शन और कूड़ा व पराली जलाने से ज्यादा बढ़ता है। आइए जानते हैं PM10 हमारे स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है।
PM10 से स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभाव
PM10 वायु प्रदूषकों से सबसे अधिक प्रभावित लोगों में बच्चे, बड़े वयस्क और हृदय और फेफड़ों की बीमारी वाले लोग शामिल हैं। PM10 एक्सपोजर के स्वास्थ्य प्रभाव अलग-अलग हो सकते हैं। शरीर बड़े कणों को खत्म कर देता है। PM10 कण इतने छोटे हैं कि आप अपनी नग्न आंखों के माध्यम से नहीं देख सकते हैं और वे गैस के रूप में कार्य करते हैं। जब आप सांस लेते हैं तो ये कण आपके फेफड़ों में चले जाते हैं जिससे खांसी और अस्थमा के दौरे पढ़ सकते हैं। उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा, स्ट्रोक और भी कई गंभीर बीमारियों का खतरा बन जाता है, इसके परिणामस्वरूप समय से पहले मृत्यु भी हो सकती है।