
Indian Children Health Crisis (photo: AI Generated)
Indian Children Fitness Report 2026: एक दौर ऐसा भी गुजरा है, जब गांवों, शहरों की गलियां और मोहल्ले शाम होते ही बच्चों के हुल्लड़ करने की आवाजों से गूंज उठते थे। कहीं खाली पड़े मैदान में क्रिकेट खेला जा रहा है, कहीं फुटबॉल। इधर मैदान में बच्चे दौड़-दौड़कर खेल रहे हैं, तो उधर साइकिल चलाने की होड़ मची है। तब हर घर में बस एक ही आवाज गूंजती थी अंधेरा होने वाला है, अब घर आ जाओ। लेकिन आज तस्वीर ठीक इससे उलटी है…। आज बच्चे घर से बाहर नहीं निकलते, उनके पैर नहीं दौड़ते मोबाइल स्क्रीन पर उंगलिया चलती हैं। पहले आंखें दूर तक देखते हुए बॉल कैच करने के लिए प्रेरित करती थीं आज घंटों स्क्रीन पर अटकी रहती हैं। शरीर कई घंटों से बैठा हुआ है, जैसे मोबाइल ने जकड़ लिया हो, ऐ नादान बच्चे यहां से हिलना भी मत…। फिक्र इस बात की है कि ऐसा ठहराव वाला बचपन अब आदत तक सीमित नहीं रहा, यह देश के भविष्य के लिए चिंतन का बड़ा सबब बन गया है। patrika.com पर पढ़ें संजना कुमार की खास रिपोर्ट…
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