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Stroke के बाद Disability कम कर सकती है नई थेरेपी, JAMA स्टडी में खुलासा

Stroke Recovery Treatment: IAMA में प्रकाशित नई स्टडी में दावा किया गया है कि स्ट्रोक के बाद दी जाने वाली नई थेरेपी मरीजों में Disability का खतरा कम कर सकती है। जानिए कैसे काम करती है यह नई तकनीक।

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भारत

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Dimple Yadav

May 19, 2026

Stroke Recovery Therapy, JAMA Study Stroke Breakthrough, Reducing Post Stroke

स्ट्रोक के खतरे को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- chatgtp)

Brain Stroke Treatment: स्ट्रोक को दुनियाभर में मौत और लंबे समय तक रहने वाली विकलांगता की बड़ी वजह माना जाता है। कई मरीजों में डॉक्टर ब्लॉकेज हटाने में सफल हो जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद मरीज पूरी तरह ठीक नहीं हो पाता। अब एक नई स्टडी में सामने आया है कि स्ट्रोक के बाद दी जाने वाली एक नई थेरेपी मरीजों में विकलांगता का खतरा कम कर सकती है।

यह रिसर्च मेडिकल जर्नल JAMA में प्रकाशित हुई है। इसमें स्पेन के 14 अस्पतालों में मरीजों पर अध्ययन किया गया। रिसर्च में पाया गया कि स्ट्रोक के बाद एक खास दवा देने से मरीजों के ठीक होने की संभावना बढ़ सकती है।

आखिर स्ट्रोक में होता क्या है?

इस्केमिक स्ट्रोक तब होता है जब दिमाग की किसी नस में खून का थक्का फंस जाता है। इससे दिमाग के हिस्से तक ऑक्सीजन और खून पहुंचना बंद हो जाता है। गंभीर मामलों में डॉक्टर थ्रोम्बेक्टॉमी नाम की प्रक्रिया करते हैं, जिसमें कैथेटर की मदद से थक्का निकाल दिया जाता है।

आमतौर पर इसके बाद माना जाता है कि ब्लड फ्लो दोबारा शुरू हो गया और मरीज सुरक्षित है। लेकिन कई मरीजों में इसके बाद भी दिमाग की छोटी नसों में ब्लॉकेज बना रहता है, जिससे रिकवरी पूरी नहीं हो पाती।

नई थेरेपी में क्या किया गया?

इस स्टडी में अल्टेप्लेस नाम की दवा का इस्तेमाल किया गया है। यह दवा खून के थक्के को घोलने में मदद करती है। पहले यह दवा ऑपरेशन से पहले दी जाती थी, लेकिन इस बार रिसर्च टीम ने इसे थक्का निकालने के बाद सीधे दिमाग की नस में दिया।रिसर्च के दौरान 440 मरीजों को दो समूहों में बांटा गया। एक समूह को सामान्य इलाज दिया गया, जबकि दूसरे समूह को थ्रोम्बेक्टॉमी के बाद 15 मिनट तक अल्टेप्लेस दवा दी गई।

क्या निकला स्टडी में?

90 दिनों बाद जब मरीजों की स्थिति देखी गई, तो जिन लोगों को नई थेरेपी दी गई थी उनमें बेहतर रिकवरी देखने को मिली। नई थेरेपी पाने वाले करीब 57% मरीज सामान्य जिंदगी के करीब लौट पाए। वहीं सामान्य इलाज वाले मरीजों में यह आंकड़ा लगभग 42% था।

कैसे मदद करती है यह दवा?

रिसर्चर्स के मुताबिक, बड़ी नस खुलने के बाद भी दिमाग की छोटी नसों में छोटे-छोटे थक्के फंसे रह जाते हैं। अल्टेप्लेस दवा इन्हें साफ करने में मदद करती है, जिससे दिमाग के टिश्यू तक बेहतर तरीके से खून पहुंच पाता है।

क्या हैं इसके खतरे?

स्टडी में कुछ जोखिम भी सामने आए। नई थेरेपी लेने वाले कुछ मरीजों में मौत का खतरा थोड़ा ज्यादा देखा गया। दिमाग में ब्लीडिंग का खतरा भी हल्का बढ़ा, इसलिए डॉक्टरों का कहना है कि इस थेरेपी पर अभी और रिसर्च की जरूरत है। यह पहली बड़ी स्टडी है जिसने दिखाया कि सिर्फ बड़ी नस खोलना ही काफी नहीं है, बल्कि छोटी नसों तक ब्लड फ्लो पहुंचाना भी जरूरी है। अगर आगे की रिसर्च में भी यही नतीजे मिले, तो भविष्य में स्ट्रोक इलाज का तरीका बदल सकता है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।