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Lung Cancer मरीजों के लिए खुशखबरी! भारत में आया 7 मिनट वाला Injection, कैंसर सर्जन ने बताया कैसे करता है काम

Lung Cancer Treatment India: भारत में फेफड़ों के कैंसर मरीजों के लिए 7 मिनट वाला नया इंजेक्शन लॉन्च हुआ है। जानिए डॉ. अंशुमान कुमार से यह इम्यूनोथेरेपी कैसे काम करती है, किसे फायदा होगा और इसकी कीमत कितनी है।

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भारत

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Dimple Yadav

May 19, 2026

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कैंसर इंजेक्शन को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर (photo- freepik)

Lung Cancer Injection: भारत में कैंसर इलाज के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। रोचे फार्मा (Roche Pharma India) ने फेफड़ों के कैंसर मरीजों के लिए एक नया 7 मिनट वाला इंजेक्शन लॉन्च किया है। यह इंजेक्शन खासतौर पर नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (एनएससीएलसी) मरीजों के लिए लाया गया है, जो फेफड़ों के कैंसर का सबसे आम प्रकार माना जाता है।

फार्माबिज में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, इस नई थेरेपी का नाम टेसेंट्रिक है, जिसमें एटेजोलिजुमैब नाम की दवा इस्तेमाल की जाती है। यह इम्यूनोथेरेपी पर आधारित इलाज है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कैंसर से लड़ने में मदद करता है।

कैंसर सर्जन डॉ. अंशुमान कुमार ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि यह तकनीक उन मरीजों के लिए काफी मददगार साबित हो सकती है जिन्हें लंबे समय तक अस्पताल में बैठकर इलाज लेना पड़ता था। हालांकि उन्होंने साफ कहा कि यह कोई कैंसर वैक्सीन नहीं है, बल्कि एक इम्यूनोथेरेपी दवा है, जिसे लेकर लोगों में गलतफहमी नहीं होनी चाहिए।

पहले घंटों लगते थे, अब सिर्फ 7 मिनट

7 मिनट वाले इंजेक्शन को लेकर उन्होंने कहा कि अब तक फेफड़ों के कैंसर मरीजों को इम्यूनोथेरेपी नसों के जरिए ड्रिप से दी जाती थी, जिसमें कई घंटे अस्पताल में बिताने पड़ते थे। लेकिन अब यह नई दवा त्वचा के नीचे इंजेक्शन के रूप में दी जाएगी और पूरा प्रक्रिया लगभग 7 मिनट में हो जाएगा। इससे मरीजों को बार-बार लंबे समय तक अस्पताल में बैठना नहीं पड़ेगा। खासकर बुजुर्ग मरीजों और दूर-दराज से इलाज कराने आने वाले लोगों को काफी राहत मिल सकती है।

कैसे काम करता है यह इंजेक्शन?

डॉ. अंशुमान ने कहा कि यह दवा पीडी-एल1 नाम के प्रोटीन को ब्लॉक करती है। आमतौर पर कैंसर कोशिकाएं इसी प्रोटीन की मदद से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता से छिप जाती हैं। जब यह प्रोटीन ब्लॉक हो जाता है, तो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कैंसर कोशिकाओं को पहचानकर उन पर हमला करने लगती है। डॉक्टरों के मुताबिक, जिन मरीजों में पीडी-एल1 का स्तर ज्यादा होता है, उनमें यह इलाज ज्यादा असरदार हो सकता है।

कीमोथेरेपी से कैसे अलग है?

कीमोथेरेपी सीधे कैंसर कोशिकाओं को मारती है, लेकिन इसमें कई बार शरीर की स्वस्थ कोशिकाएं भी प्रभावित हो जाती हैं। इसके कारण बाल झड़ना, कमजोरी, उल्टी और थकान जैसे दुष्प्रभाव ज्यादा देखने को मिलते हैं। वहीं इम्यूनोथेरेपी शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाकर कैंसर से लड़ने में मदद करती है। इसी वजह से कई मरीज इसे बेहतर विकल्प मानते हैं।

कीमत बनी सबसे बड़ी चिंता

हालांकि यह इलाज उम्मीद जगाता है, लेकिन इसकी कीमत आम लोगों के लिए चिंता का कारण बन सकती है। रिपोर्ट के अनुसार एक इंजेक्शन की कीमत करीब 3.7 लाख रुपये है। कई मरीजों को लगभग 6 खुराक तक जरूरत पड़ सकती है। यानी पूरा इलाज लाखों रुपये तक पहुंच सकता है।

डॉक्टर ने क्या दी सलाह?

डॉ. अंशुमान का कहना है कि मरीज सोशल मीडिया या अधूरी जानकारी के आधार पर इसे चमत्कारी इलाज न मानें। हर मरीज की स्थिति अलग होती है और यह थेरेपी भी डॉक्टर की सलाह और जांच के बाद ही दी जाती है। यह खबर नई इम्यूनोथेरेपी तकनीक से जुड़ी है। इसे कैंसर वैक्सीन समझना गलत होगा। यह इलाज सभी कैंसर मरीजों के लिए नहीं है और इसकी जरूरत व असर मरीज की मेडिकल स्थिति पर निर्भर करता है।

डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।