राशिफल

आज इन कार्यों के लिए सर्वोत्तम मुहूर्त, ऐसे लाभ उठाएं

विष्कुंभ नामक नैसर्गिक अशुभ योग रात्रि ९.५४ तक, इसके बाद प्रीति नामक नैसर्गिक शुभ योग है

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Nov 14, 2017
aaj ki kundli

एकादशी नन्दा संज्ञक तिथि दोपहर १२.३६ तक, तदन्तर द्वादशी भद्रा संज्ञक तिथि प्रारम्भ हो जाएगी। एकादशी में समस्त शुभ व मांगलिक कार्य, विवाह, गृहारम्भ, प्रवेश, यात्रा, प्रतिष्ठा, जनेऊ आदि विषयक कार्य और द्वादशी में विवाह, उपनयन तथा अन्य अलंकारादिक कार्य प्रशस्त हैं। पर यात्रा करना व तेल लगाना वर्जित है।

नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी ‘ध्रुव व ऊध्र्वमुख’ संज्ञक नक्षत्र दोपहर १२.३६ तक, तदन्तर हस्त ‘क्षिप्र व तिङ्र्यंमुख’ संज्ञक नक्षत्र है। उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में विवाह, यज्ञोपवीत, स्थिरता, अलंकार, घर आरम्भ व प्रवेश आदि तथा हस्त नक्षत्र में यात्रा, विद्या, विवाहादि, अलंकार और प्रतिष्ठादिक कार्य करने योग्य हैं।

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योग: विष्कुंभ नामक नैसर्गिक अशुभ योग रात्रि ९.५४ तक, इसके बाद प्रीति नामक नैसर्गिक शुभ योग है। करण: बालव नामकरण दोपहर १२.३६ तक, तदन्तर कौलवादि करण रहेंगे।

शुभ विक्रम संवत् : 207४
संवत्सर का नाम : साधारण
शाके संवत् : 193९
हिजरी संवत् : 143९, मु.मास: सफर-२४
अयन : दक्षिणायन
ऋतु : हेमन्त
मास : मार्गशीर्ष।
पक्ष : कृष्ण।

शुभ मुहूर्त: उपर्युक्त शुभाशुभ समय, तिथि, वार, नक्षत्र व योगानुसार आज उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में विवाह, प्रसूति स्नान व हलप्रवहण आदि के शुभ मुहूर्त हैं।

श्रेष्ठ चौघडि़ए: आज प्रात: ९.३० से दोपहर बाद १.३२ तक क्रमश: चर, लाभ व अमृत तथा दोपहर बाद २.५२ से सायं ४.१२ तक शुभ के श्रेष्ठ चौघडि़ए हैं एवं दोपहर ११.५० से दोपहर १२.३२ तक अभिजित नामक श्रेष्ठ महूर्त है, जो आवश्यक शुभकार्यारम्भ के लिए अत्युत्तम हैं।

व्रतोत्सव: आज उत्पन्ना (वैतरणी) एकादशी व्रत सबका, पद्मप्रभु मोक्ष दिवस (जैन), पं. जवाहर लाल नेहरू जयंती तथा बाल दिवस है।

चन्द्रमा: चन्द्रमा सम्पूर्ण दिवारात्रि कन्या राशि में है।

दिशाशूल: मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा में दिशाशूल है। चन्द्र स्थिति के अनुसार आज दक्षिण दिशा की यात्रा लाभदायक व शुभप्रद है।

राहुकाल: अपराह्न ३.०० से सायं ४.३० बजे तक राहुकाल वेला में शुभकार्यारंभ यथासंभव वर्जित रखना हितकर है।

आज जन्म लेने वाले बच्चे
आज जन्म लेने वाले बच्चों के नाम (पी, पू, ष, ण, ठ) आदि अक्षरों पर रखे जा सकते हैं। इनकी जन्म राशि कन्या तथा जन्म रजत पाद से है। सामान्यत: ये जातक कला और शास्त्रज्ञान में निपुण, सत्यवादी, सुन्दर, ऐश्वर्यवान, विद्वान, राज्यकार्य, धार्मिक, साहसी, अच्छे वक्ता और राज-समाज में अगवा होते हैं। इनका भाग्योदय लगभग ३०-३२ वर्ष की आयु तक होता है। कन्या राशि वाले जातकों को आज अपव्यय करना पड़ सकता है। शारीरिक और मानसिक कष्ट संभव है।

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Published on:
14 Nov 2017 09:32 am
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