यात्रा से नहीं लौटा पूरा परिवार, अभी भी है आस
लोकेश तिवारी/होशंगाबाद। उत्तराखंड में 16 जून 2016 को बरपे प्रकृति के कहर का शिकार हुए नरेंद्र की आंखें फिर छलछला उठीं, शनिवार को उत्तराखंड में हुई त्रासदी की यादें और अपनों को खोने का गम फिर ताजा गया और आखें नम हो गईं। त्रासदी में उनका पूरा परिवार गुम हो गया। अपनों के जाने का गम आज भी बाकी है। वे आज भी अपनों के लौटने की आस लगाए बैठे हैं। अपने भैया, भाभी, भतीजे, माता, पिता सहित परिजनों को खोने वाले नरेंद्र दीक्षित ने बताया कि उनका १० सदस्यों का परिवार उत्तराखंड यात्रा पर गया था। वे बताते हैं कि घर के हर कोने में सभी की यादें बसी हैं। इन्हीं के सहारे हम अपना जीवन गुजार रहे हैं। हमें अब भी उनके लौटने का इंतजार है।
अपने पूरे परिवार को गवां चुके नरेंद्र दीक्षित कहते हैं- अब भी कोई दरवाजा खटखटाता है तो लगता है, जैसे मेरे अपने लौट आए। वह पांच बार उनकी तलाश में केदारनाथ हो आए। मन है कि यकीन नहीं कर पा रहा कि अब मेरे अपने इस दुनिया में नहीं है, वह सभी उन्हें अकेला छोड़कर स्वर्ग सिधार चुके हैं। नरेंद्र के माता-पिता, भाई-भाभी, भतीजा, बहन और बहनोई सहित परिवार के सभी दस सदस्य हादसे के दौरान लापता हो गए। उनके शव तक नहीं मिले। नरेंद्र बताते हैं कि पांच बार ढूंढने गए, लेकिन कपड़े और सामान के अलावा कुछ नहीं मिला। यह कपड़े और सामान भी नीचे गाड़ी में रखा था, इस कारण मिला। आखिरी बार भतीजे आकाश से हुई फोन पर बात आज भी उनके कानों मंे गूंजती है। एक-एक शब्द उन्हें याद हैं। उसने कहा था- चाचा जी केदारनाथ जी के दर्शन हो गए। दादी की तबियत खराब हो गई है और सभी लोग थक गए हैं। इसलिए हम यहीं एक होटल में रुक रहे हैं। सुबह फिर से बात करूँगा। फिर उससे और परिवार से कभी बात नहीं हो पाई। नरेंद्र बताते हैं इसके बाद 16 जून को केदारनाथ में आए जलजले ने सबकुछ तबाह कर दिया। केदारनाथ की यात्रा पर गए दीक्षित परिवार के 10 सदस्य फिर कभी नहीं लौटे। हमने उन्हें ढूंढने की बहुत कोशिश की करीब ५-६ बार केदारनाथ जाकर उनकी तलाश की, लेकिन वह नहीं मिले। आज भी जब कोई दरवाजा खटखटाता है तो लगता है वे आ गए। 5 साल बाद आज भी उनका अहसास होता है।
तीन बार हुआ था रिजर्वेशन कैंसिल
केदारनाथ यात्रा जाने के पहले दीक्षित परिवार का तीन बार रिजर्वेशन कैसिंल हुआ था। केदारनाथ के दर्शन करने की इच्छा ने उन्हे पीछे नहीं हटने दिया और जून में उनका रिजर्वेशन कंफर्म होने पर 12 जून 2013 को सभी लोग रवाना हुए थे। १५ जून की सुबह सभी केदारनाथ पहुंच गए थे।
अमरनाथ की थी तैयारी
केदारनाथ दर्शन करने के बाद दीक्षित परिवार अमरनाथ यात्रा के लिए जाने वाला था, इसके लिए बड़े भाई राकेश दीक्षित ने सभी का रिजर्वेशन भी करवा लिया था। रिजर्वेशन जुलाई का था।
एक ही परिवार के 10 सदस्य थे
पिता-सुरेश चंद्र दीक्षित
माता-मालती देवी दीक्षित
भाई-राकेश दीक्षित
भाभी-अनीता
भतीजा-आकाश
छोटा भतीजा-रजत
जीजाजी-अरुण भट्ट
दीदी-उर्मिला भट्ट
भांजा-वरुण भट्ट
भांजी-वंदनी भट्ट