
होशंगाबाद/ हिंदू धर्म में अंत्येष्टि को अंतिम संस्कार माना जाता है। लेकिन अंत्येष्टि के बाद भी कुछ कर्म मृतक के पुत्र को करना होते हैं विशेषकर बड़े पुत्र के लिए। श्राद्ध कर्म उन्हीं में से एक है। जो हर मास की अमावस्या को किया जा सकता है, लेकिन भाद्रपद की पूर्णिमा से लेकर आश्विन माह की अमावस्या तक के पूरे पखवाड़े में श्राद्ध (pitru paksha 2019) कर्म करने का विधान है।
श्राद्ध किसे कहते हैं?
श्राद्ध का मतलब श्रद्धा (pitru paksha 2019) पूर्वक अपने पितरों को खुश करना होता है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार जिस किसी के परिजन अपने शरीर को छोड़कर चले गए हैं, उनकी तृप्ति और उन्नति के लिए श्रद्धा के साथ जो शुभ संकल्प और तर्पण किया जाता है, उसे श्राद्ध कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के देवता यमराज श्राद्ध पक्ष में जीव को मुक्त कर देते हैं, ताकि वे स्वजनों के यहां जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें।
पितृ पक्ष (pitru paksha 2019) का महत्व
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार देवपूजा से पहले अपने पूर्वजों की पूजा करनी चाहिए। पितरों के प्रसन्न होने पर देवता भी प्रसन्न होते हैं। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में जीवित रहते घर के बड़े बुजूर्गों का सम्मान और मृत्योपरांत श्राद्ध किए जाते हैं। दरअसल मान्यता के अनुसार यदि विधिअनुसार पितरों का तर्पण नहीं करने पर उन्हें मुक्ति नहीं मिलती है। ज्योतिषशास्त्र में पितृ दोष अहम माना जाता है। इसलिए पितृदोष से मुक्ति के लिये भी पितरों की शांति आवश्यक मानी जाती है।
किस दिन करें पूर्वज़ों का श्राद्ध
वैसे तो माह की अमावस्या को पितरों की शांति के लिए पिंड दान या श्राद्ध कर्म किए जा सकते हैं लेकिन पितृ पक्ष में श्राद्ध करने का विशेष महत्व माना जाता है। जिस पूर्वज़, पितर या परिवार के मृत सदस्य के परलोक गमन की तिथि याद हो तो पितृपक्ष में पडऩे वाली उक्त तिथि को ही उनका श्राद्ध करना चाहिये।
इन्हे होता है श्राद्ध का अधिकार
श्राद्ध का अधिकार पुत्र को प्राप्त है, लेकिन यदि पुत्र जीवित न हो तो पौत्र, प्रपौत्र या विधवा पत्नी भी श्राद्ध कर सकती है। पुत्र के न रहने पर पत्नी का श्राद्ध पति भी कर सकता है।
श्राद्ध पक्ष 2019 की महत्वपूर्ण तिथियां
पूर्णिमा श्राद्ध- 13 सितंबर 2019
पंचमी श्राद्ध- 19 सितंबर 2019
एकादशी श्राद्ध- 25 सितंबर 2019
मघा श्राद्ध- 26 सितंबर 2019
सर्वपितृ अमावस्या- 28 सितंबर 2019