दिव्या की उड़ान बनी बेटियों के सपनों की नई प्रेरणाराजस्थान की बेटियां अब देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। इसी कड़ी में जोधपुर जिले के बिसलपुर गांव की मूल निवासी दिव्या चौधरी ने कम उम्र में बड़ी उपलब्धि हासिल कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे […]
दिव्या की उड़ान बनी बेटियों के सपनों की नई प्रेरणा
राजस्थान की बेटियां अब देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही हैं। इसी कड़ी में जोधपुर जिले के बिसलपुर गांव की मूल निवासी दिव्या चौधरी ने कम उम्र में बड़ी उपलब्धि हासिल कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे समाज और प्रदेश का नाम रोशन किया है। दिव्या वर्तमान में गोवा के मडगांव शहर में रहकर पढ़ाई कर रही हैं और वहीं रोलर स्केटिंग में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं। वह होली स्प्रिट इंस्टीट्यूट, मडगांव की छठी कक्षा की छात्रा हैं। दिव्या के पिता रामप्रकाश चौधरी गोवा में किराणा एवं जनरल स्टोर का व्यवसाय करते हैं, जबकि माता रेखा देवी बेटी की पढ़ाई और खेल दोनों में लगातार प्रोत्साहन देती हैं। सिर्फ 11 वर्ष 6 महीने की उम्र में दिव्या ने 1 फरवरी 2026 को मडगांव स्थित एसजीपीडीए पार्किंग लॉट में आयोजित गोवा स्केटिंग फेस्टिवल टूर्नामेंट में अंडर-13 गल्र्स वर्ग की 1500 मीटर और 800 मीटर दोनों प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए।
सही मार्गदर्शन से छू सकते हैं ऊंचाइयां
दिव्या गोवा टीम की ओर से प्रतियोगिता में उतरी थीं और उनकी इस सफलता के बाद अब उनका चयन इंटरनेशनल रोलर स्पोट्र्स प्रोमोशनल टूर्नामेंट 2026 के लिए हुआ है, जो इंडोनेशिया में आयोजित होगा। आगामी एक माह के भीतर वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने रवाना होंगी। दिव्या एसएजी यूनिवर्सल रोलर स्केटिंग क्लब, मडगांव से प्रशिक्षण ले रही हैं, जहां उनके कोच राजेश नायक ने उनकी प्रतिभा को निखारने में अहम भूमिका निभाई है। दिव्या की सफलता यह साबित करती है कि यदि परिवार का सहयोग, सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छाशक्ति हो, तो बेटियां किसी भी क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू सकती हैं।
मेहनत, अनुशासन और परिवार का विश्वास सबसे बड़ी ताकत
दिव्या चौधरी की सफलता उन हजारों बेटियों के लिए प्रेरणा बन रही है, जो छोटे कस्बों और गांवों से बड़े सपने देखती हैं, लेकिन संसाधनों और अवसरों की कमी के कारण अक्सर पीछे रह जाती हैं। राजस्थान के एक साधारण परिवार से आने वाली दिव्या ने दिखा दिया कि सपनों को पंख देने के लिए केवल बड़े शहर या बड़े साधन जरूरी नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन और परिवार का विश्वास सबसे बड़ी ताकत होते हैं। स्कूल की पढ़ाई के साथ रोजाना अभ्यास, प्रतियोगिताओं का दबाव और पढ़ाई का संतुलन, इन सबके बीच दिव्या ने अपनी लगन को कभी कम नहीं होने दिया। आज वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने की तैयारी कर रही हैं।
बेटियों को आगे बढ़ाने में ही परिवार की असली प्रगति
दिव्या की उपलब्धि यह संदेश देती है कि यदि बेटियों को अवसर, प्रोत्साहन और समर्थन मिले, तो वे परिवार ही नहीं, पूरे देश का नाम रोशन कर सकती हैं। आज दिव्या जैसे उदाहरण समाज को यह सोचने पर मजबूर कर रहे हैं कि बेटियों को आगे बढ़ाने में ही परिवार और समाज की असली प्रगति छिपी है।