केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले आगामी आम बजट 2026 से पहले देशभर में अपेक्षाओं और सुझावों का दौर जारी है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय हिंदी दैनिक राजस्थान पत्रिका की मेजबानी में हुब्बल्ली में आम बजट को लेकर विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। यह परिचर्चा सनातन सेवा संगठन चैरिटेबल ट्रस्ट […]
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले आगामी आम बजट 2026 से पहले देशभर में अपेक्षाओं और सुझावों का दौर जारी है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय हिंदी दैनिक राजस्थान पत्रिका की मेजबानी में हुब्बल्ली में आम बजट को लेकर विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया। यह परिचर्चा सनातन सेवा संगठन चैरिटेबल ट्रस्ट के सहयोग से आयोजित हुई, जिसमें ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों व सदस्यों ने समाज, अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर अपने विचार रखे। परिचर्चा में राजस्थान पत्रिका हुब्बल्ली के संपादकीय प्रभारी अशोक सिंह राजपुरोहित ने बजट की प्रक्रिया, प्राथमिकताओं और पत्रिका के सामाजिक सरोकारों की जानकारी दी। प्रस्तुत हैं परिचर्चा में रखे गए प्रमुख विचार:
दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों को बजट में प्राथमिकता की जरूरत
सनातन सेवा संगठन चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक चेयरमैन जितेन्द्र मजेठिया ने कहा कि जीएसटी में की गई कुछ कटौतियां स्वागतयोग्य हैं, लेकिन उत्पादन को और अधिक बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने दिव्यांगजनों के लिए आर्टिफिशियल लिंब व अन्य कृत्रिम अंगों पर लगने वाले 5 प्रतिशत जीएसटी को शून्य करने की मांग की। साथ ही कहा कि दिव्यांगों के लिए स्किल डेवलपमेंट और वोकेशनल ट्रेनिंगके ठोस कार्यक्रम शुरू किए जाने चाहिए। बैंकिंग ऋण प्रक्रिया को सरल बनाने, वरिष्ठ नागरिकों को रेलवे में 30 से 40 प्रतिशत रियायत, अधिक टैक्स भरने वाले बुजुर्गों को विशेष लाभ, कम या शून्य ब्याज पर ऋण सुविधा देने की भी उन्होंने मांग रखी। ग्रुप मेडिकल इंश्योरेंस पर 18 प्रतिशत जीएसटी को कम करने और इसे इंडिविजुअल व फैमिली पॉलिसी के समान करने की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया।
सनातन संस्कृति, गौसेवा और शिक्षा में संस्कारों पर बल
ट्रस्ट के सचिव अशोक गोयल ने कहा कि सनातन संस्कृति से जुड़े धार्मिक व सामाजिक कार्यों के लिए बजट में अलग प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने गौसंरक्षण और गौसेवा के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध कराने की मांग करते हुए कहा कि इससे गायों की अवैध कटाई पर रोक लगेगी। शिक्षा क्षेत्र में योग, संस्कृत और भारतीय संस्कारों को स्कूल पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने पर बल देते हुए उन्होंने सामाजिक सेवा संगठनों को सरकारी योजनाओं से सीधे जोडऩे की मांग की। 60 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए निशुल्क या रियायती स्वास्थ्य बीमा, साल में चार बार मुफ्त हेल्थ चेक-अप, जरूरी दवाओं पर छूट, टैक्स सीमा बढ़ाने और हवाई यात्रा व तीर्थ यात्राओं में विशेष रियायत की भी मांग की गई।
मध्यम वर्ग और हुब्बल्ली के विकास पर विशेष चिंता
ट्रस्ट के कार्यकारिणी सदस्य दयाराम पटेल ने कहा कि मध्यम वर्ग लगातार दबाव में है। छोटे व्यापारी परेशान हैं और सरकार को बजट में इस वर्ग के लिए विशेष राहत देनी चाहिए। उन्होंने हुब्बल्ली के विकास और यहां आधारभूत सुविधाओं की कमी की ओर भी ध्यान दिलाया।
सरकार के कामकाज की सराहना, टैक्स नीति को यथावत रखने की मांग
ट्रस्ट के कार्यकारिणी सदस्य अमृतलाल पटेल ने कहा कि केंद्र सरकार अच्छा कार्य कर रही है। पिछले बजट में इनकम टैक्स में दी गई राहत को यथावत रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की नीतियां सकारात्मक दिशा में हैं।
उद्योग, रोजगार और कनेक्टिविटी पर जोर
ट्रस्ट के कार्यकारिणी सदस्य नरसी पटेल ने हुब्बल्ली में बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट लाने की मांग की, जिससे रोजगार सृजन के साथ-साथ छोटे व्यापारियों को भी लाभ मिलेगा।
हुब्बल्ली-अहमदाबाद सीधी हवाई सेवा पुन: शुरू करने की मांग
ट्रस्ट के कार्यकारिणी सदस्य प्रकाश माली ने हुब्बल्ली-अहमदाबाद सीधी हवाई सेवा पुन: शुरू करने की मांग करते हुए कहा कि इससे पूरे उत्तर कर्नाटक को व्यापारिक और आर्थिक लाभ होगा।
पर्यटन और युवा शक्ति को बनाया जाए विकास का आधार
ट्रस्ट के कार्यकारिणी सदस्य बालकृष्ण सराफ ने कर्नाटक के प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों के विकास पर विशेष पैकेज की मांग की। उन्होंने कहा कि आंजनेय पर्वत जैसे स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं बढ़ाने से श्रद्धा के साथ-साथ सरकारी आय में भी वृद्धि होगी।
युवाओं को देशभक्ति, संस्कार और स्किल से जोड़ें
ट्रस्ट के कार्यकारिणी सदस्य बृजमोहन भूतड़ा ने युवाओं को देशभक्ति, संस्कार और स्किल से जोडऩे पर जोर देते हुए कहा कि निजी क्षेत्र में भी युवाओं के लिए अवसर बढ़ाए जाने चाहिए।
विकासोन्मुख बजट
परिचर्चा में ट्रस्ट के कार्यकारिणी सदस्य चंपालाल सोनी ने विकासोन्मुख बजट की बात कही।