पर्व-त्योहार हमारे जीवन में कितने जरूरी विषय पर राजस्थान पत्रिका परिचर्चा
सभी धर्मों के विभिन्न पर्व उन विशेष धर्मों की धार्मिक मान्यताओं को परिलक्षित करते हैं। सभी पर्वों का धार्मिक महत्व तो है ही साथ ही वैज्ञानिक एवं मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी इनकी उपयोगिता कुछ कम नहीं है। विशेष पर्व अथवा त्योहारों पर अपना साफ सुथरा एवं सुसज्जित घर देखकर हमारा तन-मन भी पुलकित हो जाता है। स्वच्छ निर्मल मन से स्वस्थ एवं सुगंधित वातावरण में की गई पूजा-उपासना भी पूर्ण सफल होती है। ऐसे निर्मल वातावरण में जब हम ईश्वर के साथ एकाकार होने का प्रयत्न करते हैं तो हमें अनुभव होता है कि किसी सीमा तक हम ईश्वर का दर्शन भी कर पा रहे हैं क्योंकि यदि हमारा तन-मन प्रफुल्लित एवं आनंदित है तो यह भी एक प्रकार से हम पर ईश्वर का आशीर्वाद ही है।
त्योहार हमारे जीवन का हिस्सा
पर्व-त्योहार हमारे जीवन में कितने जरूरी विषय पर राजस्थान पत्रिका परिचर्चा के दौरान प्रवासियों ने कहा, त्योहार हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। भारत में अधिकांश त्योहार धर्म से जुड़े हैं। जहां हिन्दु धर्मावलम्बी दिवाली, होली, रक्षाबंधन समेत अन्य पर्व-त्योहार उत्साह के साथ मनाते हैं तो मुस्लिम ईद एवं ईसाई क्रिसमस का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। त्योहारों के माध्यम से जीवन के नैतिक सामाजिक मूल्य मनोरंजन के साथ मिल जाते हैं। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है, जो कुछ सामाजिक बंधनों और रिश्तों की सुनहरी डोर से बंधा हुआ है। व्यक्ति संपूर्ण जीवन व्यस्त रहता है, इन सबसे कुछ राहत पाने तथा कुछ समय हर्षोल्लास के साथ बिना किसी तनाव के व्यतीत करने के लिए ही मुख्यत: पर्व एवं त्योहार मनाने का प्रचलन हुआ।
हर पर्व का अपना महत्व
परिचर्चा के दौरान प्रवासियों ने कहा, हिंदुओं के मुख्य पर्व होली, दीपावली, रक्षा बंधन, दशहरा, नवरात्र आदि सभी किसी न किसी धार्मिक मान्यताओं से जुड़े हैं। धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रों के नौ दिनों में देवी की विधिवत उपासना करने से साधक अष्ट सिद्धि, धन-धान्य तथा मनोवांछित फलों को अवश्य ही प्राप्त करता है। इसी प्रकार दशहरा-मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम के प्रति समर्पित श्रद्धा का ही एक रूप है जिसे बुराई पर अच्छाई एवं असत्य पर सत्य का प्रतीक पर्व माना जाता है। प्राचीन काल से दीपावली को पंचपर्व के रूप में मनाने की प्रथा रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार होली पर्व का भी अपना अलग ही महत्वपूर्ण स्थान है। इस पर्व को भी ईश्वर के प्रति अटूट आस्था एवं विश्वास तथा बुराई पर अच्छाई के प्रतीक के रूप में माना जाता है। इन्हीं पर्व एवं त्योहारों के कारण हम अपने प्रिय जनों, मित्रों एवं रिश्तेदारों से मिलकर कुछ समय के लिए सभी तनावों को भूलकर अपना सुख-दुख बांट लेते हैं तथा अपनों के प्रेम एवं स्नेह जल से अभिषिक्त होकर आनंदित हो जाते हैं। इसी प्रकार हमारे राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस सभी धर्मों, जातियों व संप्रदायों के लोग मिल-जुल कर खुशी से मनाते हैं।
नई पीढ़ी को पर्वों से परिचित कराएं
बालोतरा जिले के गोलिया चौधरियान निवासी किशोर पटेल कहते हैं, पर्व -त्यौहार हमें जोडऩे का काम करते हैं। हमारी संस्कृति को आगे बढ़ाने में संवाहक बनते हैं। समाज एवं परिवार में पर्व-त्योहार का बहुत अधिक महत्व है। हम नई पढ़ी को भी हमारे पर्व-संस्कार से जोड़कर रखें, यह हमारी जिम्मेदारी है। पर्व हमें एकता का संदेश देते हंैं। पर्वों को मनाने के कई कारण हैं जिनमें से एक मुख्य कारण यह भी है कि इन विभिन्न पर्व एवं त्योहारों के माध्यम से हमारी सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपरा की अविरल धारा निर्बाध गति से सदैव प्रवाहित होती रहे।
संबंधों को मिलती हैं मजबूती
जालोर जिले के मोदरा निवासी नरेश शर्मा सेवग कहते हैं, आपसी भाईचारे को बढ़ाने में पर्व-त्योहार का अत्यंत महत्व है। चाहे होली हो, दीपावली हो या अन्य कोई पर्व, हमें हर पर्व-त्योहार मजबूती देने और हमारे संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने का काम करते हैं। त्योहार हमें जीवन की नीरसता से मुक्ति दिलाते हैं। त्योहार हमें आपसी वैमनस्य को भुलाकर एक-दूसरे से प्रेम के बंधन में बंधना सिखाते हैं। त्योहारों से सांस्कृतिक सद्भाव का वातावरण बनता है।
जोडऩे का काम करते हैं पर्व-त्योहार
बालोतरा जिले के सिवाना निवासी रणछोड़मल घांची कहते हैं, दीपावली का त्योहार प्रवासी अक्सर अपनी कर्मभूमि पर ही मनाते हैं लेकिन होली के पर्व पर राजस्थान जाकर सभी के साथ इस पर्व में शरीक होते रहे हैं। होली व दिवाली के साथ ही अन्य पर्व-त्योहार भी हमारे आपसी संबंधों को और मजबूत बनाने में मददगार बनते हैं। समय-समय पर वर्षारंभ से वर्षांत तक वर्षपर्यन्त कोई न कोई त्योहार मनाए जाते हैं। त्योहारों को समाज के सभी वर्गों के साथ मनाने से सामाजिक एकता में प्रगाढ़ता आती है।