हुबली

गुस्सा नहीं, प्यार और धैर्य चाहिए: वृद्धजनों की देखभाल का संदेश लेकर आगे आया मजेठिया फाउंडेशन

एक घंटे के नि:शुल्क प्रायोगिक सत्र में मरीजों से व्यवहार, होम नर्सिंग और पैलिएटिव केयर की दी जाएगी जानकारी। घर-घर जाकर लोगों को वृद्ध और मरीजों की देखभाल का प्रशिक्षण देने की पहल। युवाओं को संवेदनशील सेवा का प्रशिक्षण देगा। फाउंडेशन का उद्देश्य खासकर युवा वर्ग को संवेदनशील बनाना है ताकि नई पीढ़ी सेवा और करुणा का महत्व समझ सके।

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नि:शुल्क प्रायोगिक सत्र के बारे में जानकारी देते मजेठिया फाउंडेशन के पदाधिकारी।

मरीजों की देखभाल का प्रशिक्षण देने की पहल
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अपने कामकाज में इतने व्यस्त हो गए हैं कि घर के बुजुर्गों और बीमार परिजनों के लिए समय निकालना मुश्किल होता जा रहा है। कई बार वृद्धजन अकेलापन महसूस करते हैं, तो कई बार बीमारी के दौरान उन्हें सिर्फ दवा नहीं, बल्कि अपनापन और संवेदनशील व्यवहार की जरूरत होती है। इसी सोच के साथ मजेठिया फाउंडेशन ने घर-घर जाकर लोगों को वृद्ध और मरीजों की देखभाल का प्रशिक्षण देने की पहल शुरू की है।

दवा से ज्यादा अच्छे व्यवहार और अपनत्व की जरूरत
मजेठिया फाउंडेशन के चेयरमैन जितेन्द्र मजेठिया ने राजस्थान पत्रिका के साथ विशेष बातचीत में कहा कि यदि किसी संस्था, महिला समूह, समाज या कार्यस्थल पर कम से कम 25 लोग एकत्र हों तो उनकी प्रशिक्षित टीम वहां पहुंचेगी। टीम के साथ एम्बुलेंस, प्रशिक्षित नर्सेज, व्हीलचेयर सहित जरूरी उपकरण भी रहेंगे। करीब एक घंटे के नि:शुल्क प्रायोगिक सत्र में लोगों को यह सिखाया जाएगा कि मरीजों और वृद्धजनों की घर पर सही तरीके से देखभाल कैसे करें। उन्होंने कहा कि कई बार घर के बुजुर्ग बीमारी या बढ़ती उम्र के कारण चिड़चिड़े हो जाते हैं और अनजाने में नाराजगी जताते हैं, लेकिन ऐसे समय परिवार के सदस्यों को धैर्य और प्रेम से काम लेना चाहिए। बुजुर्गों के साथ गुस्सा नहीं करना चाहिए, उनसे अच्छी तरह बात करनी चाहिए। कई बार मरीज को दवा से ज्यादा अच्छे व्यवहार और अपनत्व की जरूरत होती है।

आत्मीयता से बात करने के तरीके समझाए जाएंगे
फाउंडेशन का उद्देश्य खासकर युवा वर्ग को संवेदनशील बनाना है ताकि नई पीढ़ी सेवा और करुणा का महत्व समझ सके। युवक-युवतियों, महिला समूहों और परिवारों को यह बताया जाएगा कि आईसीयू या अस्पताल ले जाने से पहले मरीज की घर पर किस तरह प्राथमिक देखभाल की जा सकती है। सत्र में जेरियाट्रिक केयर (वृद्ध देखभाल), पैलिएटिव केयर, राइल्स ट्यूब देखभाल, ऑक्सीजन मास्क सहायता, कैथेटर देखभाल, ट्रेकियोस्टॉमी देखभाल, व्हीलचेयर सहायता और मरीज को नहलाने जैसी जरूरी जानकारी भी दी जाएगी। साथ ही संवेदनशील संवाद और मरीज से आत्मीयता से बात करने के तरीके भी समझाए जाएंगे।

बीमारों के प्रति धैर्य और प्रेम दें
मजेठिया फाउंडेशन का मानना है कि यदि समाज का हर व्यक्ति अपने घर के बुजुर्गों और बीमारों के प्रति थोड़ा समय, धैर्य और प्रेम दे, तो कई मरीज अस्पताल की बजाय घर के स्नेहपूर्ण वातावरण में बेहतर महसूस कर सकते हैं। यही मानवता और सेवा का सबसे बड़ा रूप है। इस मौके पर पत्रकार वार्ता का आयोजन भी किया गया जिसमें फाउंडेशन के ट्रस्टी डॉ. रमेश बाबू, डॉ. वी.बी. निताली, प्रहलाद राव, अमृतलाल पटेल, सचिव अमरेश हिप्परगी, मेडिकल अधीक्षक डॉ. नागराज राव सानू एवं फाउंडेशन के सीईओ डॉ, सुनील कुकानुर उपस्थित थे।

Published on:
06 May 2026 06:16 pm
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