सुबह का समय आमतौर पर सुकून, श्रद्धा और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। मंदिर की ओर बढ़ते कदम मन में आस्था और भरोसा जगाते हैं, लेकिन हुब्बल्ली में यह भरोसा अब डगमगाने लगा है। केशवापुर क्षेत्र में वासु पूज्य जैन मंदिर के मुख्य द्वार पर एक महिला के साथ चेन तोडऩे का प्रयास और […]
सुबह का समय आमतौर पर सुकून, श्रद्धा और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। मंदिर की ओर बढ़ते कदम मन में आस्था और भरोसा जगाते हैं, लेकिन हुब्बल्ली में यह भरोसा अब डगमगाने लगा है। केशवापुर क्षेत्र में वासु पूज्य जैन मंदिर के मुख्य द्वार पर एक महिला के साथ चेन तोडऩे का प्रयास और उसी दिन पास के बदामी नगर में महिला से चेन छीनने की घटना ने शहर की कानून-व्यवस्था और सामाजिक सतर्कता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह केवल दो वारदातें नहीं, बल्कि बढ़ती असुरक्षा की स्पष्ट चेतावनी हैं।
केशवापुर की घटना बुधवार सुबह करीब सात बजे हुई, जब महिला दर्शन के लिए मंदिर जा रही थी। पीछे से आए युवक ने गले पर झपट्टा मारा। चेन तोडऩे में वह सफल नहीं हुआ, लेकिन धक्का-मुक्की में महिला गिर पड़ी। शोर मचाने पर आरोपी अपने साथी के साथ दुपहिया वाहन से फरार हो गया। यह इलाका प्रवासी जैन परिवारों की आबादी वाला है, मंदिर और गलियों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और कॉलोनी का एक मार्ग केवल पैदल चलने वालों के लिए है। इसके बावजूद अपराधियों का वहां तक पहुंच जाना बताता है कि केवल तकनीकी इंतजाम काफी नहीं, सक्रिय निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया भी जरूरी है। चिंता की बात यह है कि दोनों घटनाएं सुबह के वक्त हुईं, जब लोग स्वयं को अपेक्षाकृत सुरक्षित मानते हैं। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि चूक कहां है? पुलिस की या नागरिकों की? सच्चाई यह है कि जिम्मेदारी दोनों की है। पुलिस को संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त, सुबह-शाम विशेष निगरानी और कैमरों के फुटेज के आधार पर शीघ्र कार्रवाई करनी होगी। वहीं नागरिकों को भी बदलते हालात के अनुसार सतर्कता बढ़ानी होगी।
विशेष रूप से अधिक उम्र की महिलाओं को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। अकेले सुनसान रास्तों से बचना, समूह में मंदिर जाना, मोबाइल फोन पास रखना और कीमती चेन या आभूषण पहनने पर पुनर्विचार करना आज समय की मांग है। आस्था और परंपरा महत्वपूर्ण हैं, लेकिन सुरक्षा उनसे भी बड़ी है। मौजूदा परिस्थितियों में सादगी ही सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच बन सकती है। चेन स्नैचिंग की बढ़ती घटनाएं यह साफ संकेत देती हैं कि अपराधी अब अवसर का इंतजार नहीं करते, बल्कि अवसर पैदा करते हैं। ऐसे में पुलिस, प्रशासन और समाज तीनों को मिलकर सतर्कता, सहयोग और जागरूकता का परिचय देना होगा, तभी सुबह की प्रार्थना फिर से निश्चिंत और सुरक्षित बन सकेगी। ashok.singh@in.patrika.com