कर्नाटक के अति-पिछड़े आदिवासी समुदायों में शामिल कोरागा समाज को सरकारी नौकरियों में सीधी भर्ती का लाभ दिलाने की मांग एक बार फिर जोर पकडऩे लगी है।
इसी कड़ी में विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) मंजूनाथ ने मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या से हस्तक्षेप कर समुदाय की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करने का आग्रह किया है। एमएलसी ने बताया कि कर्नाटक और केरल के कोरागा विकास संघों के महासंघ के बैनर तले समुदाय के सदस्य मणिपाल स्थित उडुपी जिला उपायुक्त कार्यालय के सामने 15 दिनों से अधिक समय से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी काले बैंड पहनकर दिन-रात धरने पर बैठे हैं और सरकार से ठोस निर्णय की मांग कर रहे हैं।
शिक्षा के बावजूद रोजगार से वंचित युवा
महासंघ के समन्वयक के. पुथरन ने कहा कि कोरागा समुदाय के युवा आज भी सामाजिक पिछड़ेपन और हीन भावना का सामना कर रहे हैं। कई युवा डिग्री और उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद प्रतियोगी परीक्षाओं में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाते, जिसके चलते उन्हें अपनी योग्यता से कहीं कम स्तर की नौकरियों में काम करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कई शिक्षित युवा नगर पालिकाओं में मजदूर के रूप में कार्य करने को मजबूर हैं। ऐसे में सीधी भर्ती की व्यवस्था उनके लिए सम्मानजनक रोजगार और सामाजिक उन्नति का माध्यम बन सकती है। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि सीधी भर्ती होती है, तो चयनित युवाओं को उनकी शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप पद दिए जाएं।
सरकार के वादे पूरे नहीं हुए
एमएलसी मंजूनाथ ने कहा कि राज्य सरकार ने पहले भी कोरागा समुदाय को सीधी भर्ती देने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं हुआ है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि सामाजिक न्याय के तहत इस मांग पर गंभीरता से विचार कर नीतिगत निर्णय लिया जाए।