हुबली

दक्षिण में भी मरुधर का जोश: व्यवसाय के साथ खेल की परंपरा कायम, 15 वर्षों से रोज सुबह मैदान में जुटते हैं 30 खिलाड़ी

राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी के जन्म शताब्दी वर्ष एवं हुब्बल्ली संस्करण के 21वें स्थापना दिवस आयोजन की कड़ी में मैत्री वॉलीबॉल मैच का आयोजन

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प्रतियोगिता में शामिल खिलाड़ी।

राजस्थान मूल के लोग जहां एक ओर दक्षिण भारत में व्यवसाय के क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहे हैं, वहीं खेलों के प्रति उनका जुनून भी कम नहीं है। हुब्बल्ली में सक्रिय मरुधर वॉलीबॉल ग्रुप इसका सशक्त उदाहरण है, जहां करीब 30 प्रवासी राजस्थानी खिलाड़ी पिछले 15 वर्षों से नियमित रूप से वॉलीबॉल खेलते आ रहे हैं। राजस्थान पत्रिका के संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी के जन्म शताब्दी वर्ष एवं हुब्बल्ली संस्करण के 21वें स्थापना दिवस आयोजन की कड़ी में शुक्रवार को मैत्री वॉलीबॉल मैच का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में तीन टीमों ने भाग लिया, जिसमें पटेल स्पोट्र्स क्लब विजेता बना, जबकि चौधरी स्पोट्र्स क्लब उपविजेता रहा। राजपुरोहित स्पोट्र्स क्लब का प्रदर्शन भी सराहनीय रहा।

प्रतिभाओं का सम्मान: खिलाडिय़ों ने दिखाया दमखम
मैत्री मैच में जूंझाराम काग आमलारी को बेस्ट ऑफ सेंटर, किशोर पटेल खाखरलाई को बेस्ट ऑफ नेट, भोपालसिंह राजपुरोहित असाड़ा को बेस्ट सर्विस और कपूर चौधरी हरजी को बेस्ट अटैकर का पुरस्कार दिया गया। मरुधर वॉलीबॉल ग्रुप में चौधरी स्पोट्र्स क्लब (कप्तान- जूंझाराम काग आमलारी), पटेल स्पोट्र्स क्लब (कप्तान- राजाराम काग आमलारी), राजपुरोहित स्पोट्र्स क्लब (कप्तान- भोपालसिंह राजपुरोहित असाड़ा) और पटेल शूटर टीम (कप्तान- परीक्षित पटेल मेर-मंडवाड़ा) सक्रिय रूप से भाग लेती हैं।

अनुभव और युवाओं का संगम: हर उम्र के खिलाड़ी शामिल
इस समूह की खासियत यह है कि इसमें 14 वर्षीय गजेन्द्र चौधरी वरिया जैसे युवा खिलाड़ी से लेकर 61 वर्षीय जगाराम गिंगोड़ा बग तक शामिल हैं। करीब आधा दर्जन खिलाड़ी 50 वर्ष से अधिक आयु के हैं, जो युवाओं के साथ पूरे उत्साह से खेलते हैं। खिलाड़ी प्रतिदिन सुबह 6:30 से 8 बजे तक अभ्यास करते हैं। उन्होंने अपने ही संसाधनों से मैदान तैयार किया है। शुरुआत में बांस की लकड़ी से बने साधारण ग्राउंड को अब मिट्टी डलवाकर विकसित किया गया है। यहां हर साल होली, दीपावली और रामनवमी पर तीन बड़े टूर्नामेंट आयोजित किए जाते हैं, जिनमें करीब 8 टीमें भाग लेती हैं। कई बार डे-नाइट मैच भी खेले जाते हैं।

पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी: मैदान बना हरियाली का केंद्र
खिलाडिय़ों ने मैदान परिसर में नीम, पीपल, बरगद और नारियल सहित दो दर्जन से अधिक पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया है। मैदान की देखरेख में चन्द्राराम पटेल चाली और जगराम पटेल आमलारी का विशेष योगदान रहता है, जबकि पुखराज दर्जी पादरू ग्राउंड मैनेजमेंट संभालते हैं।

परिवार की भागीदारी: पिता-पुत्र साथ खेलते नजर आए
इस ग्रुप में कई पिता-पुत्र की जोडिय़ां भी एक साथ खेलती हैं, जो खेल के प्रति पीढिय़ों के जुड़ाव को दर्शाता है। चेलाराम चौधरी बूड़ावाड़ा अपने बेटों प्रदीप और कृष्णा के साथ, ओमाराम सोलंकी खाखरलाई अपने बेटे सुरेश के साथ तथा तेजाराम चौधरी मालवी सिणली अपने बेटे दक्ष के साथ नियमित रूप से मैदान में नजर आते हैं।

सामाजिक सरोकार: खेल के साथ जुड़ा संदेश
कार्यक्रम में राजस्थान पत्रिका हुब्बल्ली के संपादकीय प्रभारी अशोक सिंह राजपुरोहित ने पत्रिका के सामाजिक सरोकारों और संस्थापक श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी के जीवन पर प्रकाश डाला तथा हुब्बल्ली संस्करण के स्थापना दिवस के आयोजन की जानकारी दी। सामाजिक कार्यकर्ता किशोर पटेल गोलिया चौधरियान ने खेलों को जीवन में आवश्यक बताते हुए इस तरह के आयोजनों की सराहना की। मरुधर ग्रुप के वरिष्ठ सदस्य तेजाराम चौधरी मालवी सिणली ने प्रवासी खिलाडिय़ों को खेल भावना के साथ भाग लेने के लिए प्रेरित किया। अंत में विजेता एवं उपविजेता टीमों के कप्तानों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कारों की व्यवस्था तेजाराम चौधरी मालवी सिणली की ओर से की गई।

Updated on:
20 Mar 2026 10:04 am
Published on:
20 Mar 2026 10:03 am
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