उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की भी मांगदावणगेरे की सांसद प्रभा मल्लिकार्जुन ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को ज्ञापन सौंपकर एमबीबीएस प्रथम वर्ष की परीक्षा में असफल विद्यार्थियों को अतिरिक्त प्रयास (मर्सी अटेम्प्ट) देने और उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की मांग की है। ज्ञापन में उन्होंने कहा कि नेशनल मेडिकल कमीशन द्वारा निर्धारित अधिकतम […]
उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की भी मांग
दावणगेरे की सांसद प्रभा मल्लिकार्जुन ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा को ज्ञापन सौंपकर एमबीबीएस प्रथम वर्ष की परीक्षा में असफल विद्यार्थियों को अतिरिक्त प्रयास (मर्सी अटेम्प्ट) देने और उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन की मांग की है। ज्ञापन में उन्होंने कहा कि नेशनल मेडिकल कमीशन द्वारा निर्धारित अधिकतम चार प्रयासों की सीमा के कारण कर्नाटक के 275 से अधिक मेडिकल विद्यार्थियों का भविष्य संकट में है। नियम के अनुसार, यदि कोई छात्र एमबीबीएस प्रथम प्रोफेशनल परीक्षा चार प्रयासों में उत्तीर्ण नहीं कर पाता, तो उसे पाठ्यक्रम से बाहर कर दिया जाता है।
कोविड काल का असर
सांसद ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान कक्षाएं लंबे समय तक बाधित रहीं, जिससे कई छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई। ऐसे में चार प्रयासों के बाद स्थायी रूप से अयोग्य घोषित करना मानवीय दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक मामले में पुनर्मूल्यांकन का निर्देश दिया था, लेकिन विश्वविद्यालय ने एनएमसी नियमों का हवाला देते हुए इसे लागू करने में असमर्थता जताई। अक्टूबर 2025 में हाईकोर्ट ने पांचवें प्रयास की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए कहा था कि वह एनएमसी के नियमों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
छात्रों की मानसिक और आर्थिक परेशानी
सांसद ने बताया कि इस नियम के कारण छात्रों और उनके परिवारों पर भारी मानसिक एवं आर्थिक दबाव पड़ रहा है। ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने भी अतिरिक्त प्रयास की मांग को लेकर याचिका दायर की है। उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि एनएमसी के नियम 7.7 की समीक्षा की जाए और विद्यार्थियों को एक और अवसर या पुनर्मूल्यांकन की सुविधा दी जाए।