हुबली

सागवान की लकड़ी पर उकेरे गणेश के 36 स्वरूप, रविनगर का बालमुरी गणपति मंदिर बना आस्था का केंद्र

हुब्बल्ली शहर के रविनगर स्थित बालमुरी गणपति मंदिर आस्था के साथ अपनी अनूठी कलात्मक पहचान के लिए भी श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। मंदिर की सबसे खास विशेषताओं में चार फीट से अधिक ऊंची काले पत्थर की बालमुरी गणपति प्रतिमा और मुख्य मंदिर के चारों ओर सागवान की लकड़ी पर उकेरे गए गणेश के 36 अलग-अलग स्वरूप शामिल हैं। लकड़ी पर की गई बारीक नक्काशी मंदिर की सुंदरता को अलग पहचान देती है।
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आस्था का केंद्र: राणेबेन्नूर के काले पत्थर से बनी चार फीट से अधिक ऊंची बालमुरी गणपति प्रतिमा।
आस्था का केंद्र: राणेबेन्नूर के काले पत्थर से बनी चार फीट से अधिक ऊंची बालमुरी गणपति प्रतिमा।

1997 में हुई थी गणपति प्रतिमा की प्रतिष्ठा

रविनगर गणेश देवस्थान समिति मंदिर की देखरेख करती है। मंदिर में 2 जून 1997 को गणपति प्रतिमा की प्रतिष्ठा की गई थी। इसके बाद से यह मंदिर रविनगर और आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मंदिर के धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में गजानन उत्सव समिति और रविनगर अभिवृद्धि संघ भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं।

राणेबेन्नूर के काले पत्थर से बनी बालमुरी गणपति प्रतिमा

मंदिर में स्थापित बालमुरी गणपति की प्रतिमा राणेबेन्नूर के काले पत्थर से निर्मित है। चार फीट से अधिक ऊंची प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां दर्शन के लिए उत्तर कर्नाटक के विभिन्न जिलों के साथ मुंबई, पुणे, हैदराबाद सहित अन्य शहरों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं।

कला और आस्था का संगम: मंदिर की लकड़ी की सजावट में तीन-तीन की पंक्तियों में उकेरी गई गणेश प्रतिमाएं, जिनके नाम कन्नड़ भाषा में अंकित हैं।

सागवान की लकड़ी पर उकेरे गणेश के 36 स्वरूप

मंदिर की कलात्मक पहचान को सबसे खास बनाते हैं गणेश के 36 स्वरूप। मुख्य मंदिर के चारों ओर सागवान की लकड़ी पर इन प्रतिमाओं को तीन-तीन की पंक्तियों में उकेरा गया है। प्रत्येक प्रतिमा के ऊपर संबंधित गणेश स्वरूप का नाम कन्नड़ भाषा में अंकित है। करीब एक वर्ष पहले मंदिर के मुख्य भाग के चारों ओर यह लकड़ी की नक्काशी कराई गई। आचार्य राजगोपालाचार्य कुन्दापुर के मार्गदर्शन में यह कार्य पूरा किया गया। मंदिर के ट्रस्टी पांडपा एस. पाटिल ने इसमें विशेष सहयोग दिया।

एक नजर में 36 स्वरूप: रविनगर गणपति मंदिर के मुख्य भाग के चारों ओर सागवान की लकड़ी पर उकेरे गए गणेश के विभिन्न स्वरूप।

सात दिन तक चलता है गणपति महोत्सव

मंदिर में प्रतिवर्ष गणपति महोत्सव सात दिनों तक धूमधाम से मनाया जाता है। इस दौरान गणपति हवन, अभिषेक सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। इसके साथ सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। बच्चों के लिए फैंसी ड्रेस और ड्रॉइंग प्रतियोगिताएं होती हैं। इसके अलावा मल्लखंभ, स्थानीय नृत्य, गिरिजा कल्याण, सत्यनारायण पूजा सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया जाता है।

पांडपा एन. पाटिल, ट्रस्टी, रविनगर गणेश देवस्थान समिति

तीन दशकों से आस्था का केंद्र

रविनगर गणेश देवस्थान समिति के ट्रस्टी पांडपा एन. पाटिल के अनुसार, रविनगर का बालमुरी गणपति मंदिर करीब तीन दशकों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ उत्तर कर्नाटक और मुंबई, पुणे व हैदराबाद जैसे शहरों से भी भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर की धार्मिक परंपराओं को निरंतर आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

बी. एस. पाटिल, ट्रस्टी, रविनगर गणेश देवस्थान समिति

काले पत्थर की प्रतिमा विशेष पहचान

रविनगर गणेश देवस्थान समिति के ट्रस्टी बी. एस. पाटिल के अनुसार, राणेबेन्नूर के काले पत्थर से बनी चार फीट से अधिक ऊंची गणपति प्रतिमा मंदिर की विशेष पहचान है। वार्षिकोत्सव में गणपति हवन और अभिषेक सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन होते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और मंदिर की परंपराओं के संरक्षण पर समिति लगातार ध्यान दे रही है।

प्रभाकर कुलकर्णी, गजानन उत्सव समिति

सात दिवसीय महोत्सव में संस्कृति से जुड़ते हैं बच्चे

गजानन उत्सव समिति के प्रभाकर कुलकर्णी के अनुसार, गणपति महोत्सव सात दिनों तक उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। बच्चों के लिए फैंसी ड्रेस और ड्रॉइंग प्रतियोगिताओं के साथ मल्लखंभ, स्थानीय नृत्य और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य नई पीढ़ी को धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ना है।

नागराज रमेश संकसलकर, रविनगर अभिवृद्धि संघ

36 स्वरूप मंदिर की अनूठी पहचान

रविनगर अभिवृद्धि संघ के नागराज रमेश संकसलकर के अनुसार, मंदिर के चारों ओर सागवान की लकड़ी पर उकेरे गए गणेश के 36 स्वरूप इसकी अनूठी पहचान हैं। हर प्रतिमा का नाम कन्नड़ भाषा में अंकित किया गया है। आचार्य राजगोपालाचार्य कुन्दापुर के मार्गदर्शन में तैयार यह कलात्मक कार्य मंदिर की सुंदरता और आकर्षण को और बढ़ाता है।

रविनगर गणपति मंदिर
Updated on:
10 Sept 2026 08:06 pm
Published on:
10 Sept 2026 07:37 pm