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अक्की होंडा गणेश मंदिर: राजस्थान से आई संगमरमर की गणपति प्रतिमा, साढ़े तीन दशक से आस्था, परंपरा और भव्य स्थापत्य का केंद्र

कर्नाटक के हुब्बल्ली शहर के अक्की होंडा क्षेत्र में स्थित श्री गणेश मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर में पत्थर से निर्मित बालमुरी गणपति की आकर्षक प्रतिमा विराजमान है। स्थानीय श्रद्धालुओं और व्यापारियों के सहयोग से निर्मित इस मंदिर का इतिहास करीब साढे तीन दशक से अधिक पुराना है। मंदिर का भव्य गोपुरम और उस पर उकेरे गए गणपति के विभिन्न स्वरूप इसकी विशेष पहचान हैं।
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अक्की होंडा गणेश मंदिर

अक्की होंडा गणेश मंदिर

1981 में शुरू हुआ मंदिर निर्माण, 1989 में हुई प्राण प्रतिष्ठा
मंदिर निर्माण का कार्य वर्ष 1981 में मूरुसाविरमठ के तत्कालीन धर्मगुरु गंगाधर राजयोगींद्र महास्वामी के सान्निध्य में शुरू हुआ। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने मंदिर निर्माण के लिए सहयोग और दान दिया। वर्ष 1989 में राजस्थान से संगमरमर की गणपति प्रतिमा तैयार कराई गई। प्रतिमा को विशेष रूप से हुब्बल्ली लाया गया और शहर के विभिन्न क्षेत्रों से शोभायात्रा निकाली गई। मंगल वाद्यों के बीच प्रतिमा को मंदिर पहुंचाया गया, जहां गंगाधर राजयोगींद्र महास्वामी के सान्निध्य में इसकी प्राण प्रतिष्ठा की गई। इसके बाद से मंदिर में नियमित रूप से त्रिकाल पूजा की परंपरा जारी है। दो वर्ष बाद यहां नियमित महा रुद्राभिषेक भी शुरू किया गया।

गोपुरम पर गणपति के विविध स्वरूप
मंदिर का गोपुरम श्रद्धालुओं और आगंतुकों को विशेष रूप से आकर्षित करता है। गोपुरम के विभिन्न स्तरों पर भगवान गणपति के अलग-अलग स्वरूप और मुद्राएं उकेरी गई हैं। मंदिर की स्थापत्य शैली और धार्मिक वातावरण इसे शहर के प्रमुख गणपति मंदिरों में विशेष स्थान दिलाता है।

गणेश जयंती और गणेशोत्सव पर विशेष आयोजन
मंदिर में प्रतिवर्ष गणेश जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई जाती है। इस अवसर पर महिलाओं के लिए उड़ी तुंबुवा सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पालना उत्सव और शाम को पालकी शोभायात्रा भी निकाली जाती है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर यहां 11 दिवसीय गणेशोत्सव आयोजित होता है। उत्सव प्रतिमा को मंगल वाद्यों के साथ भव्य रूप से लाया जाता है और मंदिर परिसर में शोभायात्रा निकाली जाती है। प्रतिमा स्थापना के बाद हुब्बल्ली के विभिन्न मठों के धर्मगुरुओं को आमंत्रित कर उनका सम्मान किया जाता है और श्रद्धापूर्वक आशीर्वाद लिया जाता है।

रजत सिंहासन और स्वर्ण आभूषण से सुसज्जित गजानन
श्रद्धालुओं और स्थानीय व्यापारियों के सहयोग से गणपति प्रतिमा के लिए रजत सिंहासन और रजत मुकुट तैयार कराया गया है। भगवान गणपति को लगभग स्वर्ण आभूषण भी अर्पित किया गया है। मंदिर में श्रद्धालुओं की भागीदारी लगातार बनी रहती है।

तीन समितियां संभालती हैं व्यवस्थाएं
मंदिर की धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के संचालन के लिए श्री गणेश मंदिर अक्की होंडा ट्रस्ट के अंतर्गत तीन उपसमितियां बनाई गई हैं। इनमें गणेश उत्सव समिति, गणेश निरंतर पूजा सेवा समिति और गणेश प्रसाद सेवा समिति शामिल हैं। प्रत्येक समिति में करीब 10 सदस्य हैं, जो संबंधित जिम्मेदारियों का संचालन करते हैं।

आस्था का प्रमुख केंद्र है अक्की होंडा गणेश मंदिर
श्री गणेश मंदिर अक्की होंडा ट्रस्ट के अध्यक्ष वी. आर. बोरट्टी बताते हैं, अक्की होंडा का गणेश मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु विघ्नहर्ता गजानन के दर्शन कर सुख, शांति और मंगलकामना की प्रार्थना करते हैं। मंदिर की धार्मिक परंपराओं को श्रद्धालुओं के सहयोग से निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है।

हर मंगलवार श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद सेवा
गणेश उत्सव समिति के अध्यक्ष आनन्द हिप्परगी ने बताया कि मंदिर में प्रत्येक मंगलवार श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की व्यवस्था की गई है। इसमें श्रद्धालुओं और समिति के सदस्यों का निरंतर सहयोग मिल रहा है। मंदिर में पेयजल, प्रसाद वितरण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरों सहित आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

राजस्थान से आई संगमरमर की गणपति प्रतिमा
राजस्थान मूल के हुब्बल्ली में व्यवसायरत रमेश राजपुरोहित आमलारी ने बताया कि मंदिर में विराजमान गणपति की संगमरमर प्रतिमा राजस्थान में तैयार की गई थी। प्रतिमा की भव्यता और सुंदरता श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करती है। राजस्थान से गणपति प्रतिमा का हुब्बल्ली पहुंचना हमारे लिए गर्व और आस्था का विषय है।

कार्तिक दीपोत्सव से विशेष श्रृंगार तक धार्मिक आयोजन
पुजारी शिवकुमार व विश्वनाथ ने बताया कि कार्तिक मास में मंदिर में विशेष दीपोत्सव और दीप प्रज्वलन के धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। संकष्टी सहित विशेष अवसरों पर रुद्राभिषेक और अन्य धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। विभिन्न पर्वों पर गणपति का फूलों और अन्य सामग्रियों से विशेष श्रृंगार किया जाता है, जिसे देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।