
गर्भगृह का आकर्षण: मंदिर के गर्भगृह में स्थापित दगडूशेठ गणपति की शैली से प्रेरित आकर्षक गणेश प्रतिमा।
आठों प्रतिकृतियों के दर्शन एक ही स्थान पर
महाराष्ट्र में अष्टविनायक के आठ प्रसिद्ध मंदिर अलग-अलग स्थानों पर स्थित हैं। इनके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को लंबी यात्रा करनी पड़ती है, लेकिन हुब्बल्ली के इस मंदिर में इन आठों गणपति स्वरूपों की प्रतिकृतियों के दर्शन एक ही स्थान पर संभव हैं। यही विशेषता इस मंदिर को शहर के प्रमुख गणेश मंदिरों में अलग पहचान दिलाती है। स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ ही बाहर से आने वाले लोग भी मंदिर की इस अनूठी व्यवस्था को देखने पहुंचते हैं।
1980 से शुरू हुई आस्था की यात्रा
वर्ष 1980 से सार्वजनिक गणेश प्रतिमा की स्थापना की परंपरा चली आ रही थी। समय के साथ समिति के सदस्यों ने शहर में एक विशेष और स्थाई गणेश मंदिर के निर्माण का संकल्प लिया। इसके बाद मंदिर निर्माण की योजना को आकार दिया गया। ट्रस्ट से जुड़े मदन गोखले के नेतृत्व में सदस्य महाराष्ट्र के अष्टविनायक मंदिरों तक पहुंचे और वहां स्थापित गणपति प्रतिमाओं की जानकारी जुटाई। उन्हीं स्वरूपों के अनुरूप प्रतिमाएं तैयार कर हुब्बल्ली में एक ही मंदिर में स्थापित करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद वर्ष 2000 में मंदिर का निर्माण कराया गया।
महाराष्ट्र की अष्टविनायक परंपरा की झलक
अष्टविनायक परंपरा में गणेश के आठ प्रमुख स्वरूपों की पूजा की जाती है। हुब्बल्ली के इस मंदिर में महाराष्ट्र के प्रसिद्ध अष्टविनायक मंदिरों की प्रतिमाओं के अनुरूप गणपति स्वरूप स्थापित किए गए हैं। इनमें मोरेगांव के मयूरेश्वर, सिद्धटेक के सिद्धिविनायक, पाली के बल्लालेश्वर, महाड के वरदविनायक, थेऊर के चिंतामणि, लेण्याद्री के गिरिजात्मज, ओझर के विघ्नेश्वर और रांजणगांव के महागणपति की अष्टविनायक परंपरा की झलक मिलती है।
गर्भगृह में दगडूशेठ शैली की प्रतिमा
मंदिर का एक और आकर्षण इसका गर्भगृह है। यहां पुणे के प्रसिद्ध दगडूशेठ गणपति की शैली से प्रेरित गणेश प्रतिमा स्थापित की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रतिमा को बागलकोट के शिल्पकार ए. ए. बडिगेर ने तैयार किया था। अष्टविनायक स्वरूपों के साथ गर्भगृह में स्थापित यह आकर्षक गणपति प्रतिमा मंदिर की धार्मिक और कलात्मक विशेषता को और बढ़ाती है।
हुब्बल्ली की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण पड़ाव
तेजी से विकसित हो रहे हुब्बल्ली में धार्मिक स्थलों की अपनी अलग पहचान है। सिद्धारूढ़ मठ, चंद्रमौलेश्वर मंदिर सहित अनेक धार्मिक स्थल शहर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से जुड़े हैं। इन्हीं के बीच अष्टविनायक मंदिर अपनी विशिष्ट अवधारणा के कारण विशेष महत्व रखता है। एक ही परिसर में आठ गणपति स्वरूपों के दर्शन की सुविधा इसे आम गणेश मंदिरों से अलग बनाती है।
अष्टविनायक परंपरा को एक ही स्थान पर देखने का अनुभव
अष्ठविनायक देवस्थान ट्र्रस्ट के ट्रस्टी हिमाकर गौडर कहते हैं, हुब्बल्ली के धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से भी यह मंदिर महत्वपूर्ण है। महाराष्ट्र की प्रसिद्ध अष्टविनायक परंपरा को हुब्बल्ली में एक ही स्थान पर देखने और अनुभव करने का अवसर इस मंदिर को वास्तव में खास बनाता है।
श्रद्धा और आस्था का केंद्र
पुजारी माधवाचार्य कहते हैं, गणेशोत्सव के दिनों में तो गणपति मंदिरों में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ रहती है, लेकिन अष्टविनायक मंदिर सालभर श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना रहता है। विघ्नहर्ता के आठ स्वरूपों के दर्शन के साथ यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु मनोकामना पूर्ति और जीवन के विघ्नों के निवारण की प्रार्थना करते हैं।
Updated on:
7 Sep 2026, 6:14 PM IST
Published on:
7 Sep 2026, 5:08 PM IST
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