हुबली

अनुशासन, सेवा और नेतृत्व से जुड़ रहे हजारों विद्यार्थी: स्काउट-गाइड्स का बढ़ता आकर्षण, 560 स्कूलों में सक्रिय इकाइयां

स्काउट एवं गाइड्स लगातार विस्तार पा रहाधारवाड़ जिले में स्काउट एवं गाइड्स लगातार विस्तार पा रहा है। विद्यार्थियों में इसके प्रति बढ़ता उत्साह इस बात का संकेत है कि नई पीढ़ी अनुशासन, सेवा और नेतृत्व जैसे मूल्यों को अपनाने के लिए तत्पर है। वर्तमान में स्काउट एवं गाइड्स डिस्ट्रिक्ट ऑफिस का नेतृत्व जिला चीफ कमिश्नर […]

2 min read
आपदा में सेवा का संकल्प: प्राथमिक उपचार और सुरक्षित तरीके से घायलों को अस्पताल पहुंचाने का अभ्यास करते स्काउट-गाइड सदस्य।

स्काउट एवं गाइड्स लगातार विस्तार पा रहा
धारवाड़ जिले में स्काउट एवं गाइड्स लगातार विस्तार पा रहा है। विद्यार्थियों में इसके प्रति बढ़ता उत्साह इस बात का संकेत है कि नई पीढ़ी अनुशासन, सेवा और नेतृत्व जैसे मूल्यों को अपनाने के लिए तत्पर है। वर्तमान में स्काउट एवं गाइड्स डिस्ट्रिक्ट ऑफिस का नेतृत्व जिला चीफ कमिश्नर श्रीसेल करिकट्टी कर रहे हैं। एलकेजी से लेकर डिग्री स्तर तक संचालित यह गतिविधि विद्यार्थियों को चरणबद्ध तरीके से आगे बढऩे का अवसर देती है। प्रवेश के साथ शुरुआत होती है और इसके बाद प्रथम, द्वितीय व तृतीय सोपान, राज्य पुरस्कार तथा अंतत: राष्ट्रपति पुरस्कार तक पहुंचने की प्रेरक यात्रा तय की जाती है। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त करने की चाह विद्यार्थियों में विशेष उत्साह पैदा कर रही है। स्काउट-गाइड्स में आयु के अनुसार अलग-अलग वर्ग बनाए गए हैं। 3 से 6 वर्ष तक लड़कों को बनिज और लड़कियों को एफ्रोन कहा जाता है। ६ से 10 वर्ष तक लड़के कब और लड़कियां बुलबुल कहलाते हैं। 10 से 16 वर्ष तक लड़के स्काउट्स और लड़कियां गाइड्स होती हैं। 16 से 21 वर्ष तक लड़के रोवर्स और लड़कियां रेंजर्स कहलाती हैं। 21 वर्ष से ऊपर एडल्ट लीडर के रूप में जिम्मेदारी निभाई जाती है।

सुदृढ़ प्रशिक्षण व्यवस्था
स्काउट-गाइड्स की खासियत इसका अनुशासित प्रशिक्षण है। शुरुआत सात दिन की बेसिक ट्रेनिंग से होती है, जिसमें झंडा गीत, प्रार्थना, नियम और संगठन की मूल जानकारी दी जाती है। इसके बाद सात दिन की एडवांस ट्रेनिंग में गांठ बांधना, रस्सी कार्य, टेंट लगाना और प्राथमिक उपचार जैसे व्यावहारिक कौशल सिखाए जाते हैं। हिमालयन उडबेज प्रशिक्षण में इन सभी का उन्नत स्तर का अभ्यास कराया जाता है। असिस्टेंट लीडर ट्रेनर (एएलटी) और लीडर ट्रेनर (एलटी) वर्ग एडल्ट लीडरों को प्रशिक्षित करते हैं। धारवाड़ जिले में वर्तमान में एएलटी में 3 महिलाएं और 2 पुरुष सक्रिय हैं। नई स्कूलों में स्काउट इकाई प्रारंभ करने से पहले शिक्षकों को सात दिन की रेजिडेंशियल ट्रेनिंग दी जाती है, जिससे कार्यक्रम प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।

560 स्कूलों में सक्रिय, 20 हजार से अधिक जुड़े
धारवाड़ जिले के 560 स्कूलों में स्काउट-गाइड्स की इकाइयाँ कार्यरत हैं। प्रत्येक स्कूल में दो से तीन प्रशिक्षित शिक्षक गतिविधियों का संचालन करते हैं। पिछले एक वर्ष में लगभग 20 हजार विद्यार्थी और शिक्षक इस आंदोलन से जुड़े हैं। स्काउट-गाइड्स केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज सेवा में भी अग्रणी है। सार्वजनिक स्थलों, डीसी ऑफिस, एसपी ऑफिस और बस स्टेशन की सफाई अभियान, रोड सेफ्टी जागरूकता, परिसर संरक्षण संदेश, कर्नाटक पोल्यूशन विभाग व वन विभाग के साथ वृक्षारोपण और औषधीय पौधों की जानकारी जैसे कार्य नियमित रूप से किए जाते हैं। कोरोना काल में पूरे कर्नाटक में एक करोड़ मास्क वितरित किए गए, जबकि धारवाड़ जिले में एसएसएलसी परीक्षा के दौरान 30 हजार मास्क उपलब्ध कराए गए।

आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र
धारवाड़ स्काउट एवं गाउड से जुड़े एस.एन. पुजार ने बताया कि धारवाड़ जिले का प्रशिक्षण केंद्र डडिकमलापुर में स्थित है, जो लगभग 8 किमी दूर 20 एकड़ क्षेत्र में फैला है और वर्षभर संचालित होता है। प्रदेश स्तर पर प्रमुख प्रशिक्षण केंद्रों में कोंडजी बसप्पा (हरिहर तालुक, दावणगेरे) और डॉ. एनी बेसेंट स्काउट गाइड स्टेट ट्रेनिंग सेंटर (डोडाबल्लापुर, चिकबल्लापुर) शामिल हैं। स्काउट एवं गाइड्स से जुड़े विद्यार्थियों को कई डिप्लोमा और इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में प्रवेश के दौरान वरीयता मिलती है। यही कारण है कि स्कूल-कॉलेजों में इसका आकर्षण तेजी से बढ़ रहा है।

Updated on:
19 Feb 2026 06:58 pm
Published on:
19 Feb 2026 06:57 pm
Also Read
View All

अगली खबर