राजस्थान से कर्नाटक आने-जाने वाले यात्रियों के लिए इस समय रेल यात्रा गंभीर संकट में है। मई महीने में इस मार्ग की लगभग सभी प्रमुख ट्रेनों में या तो टिकट उपलब्ध नहीं है या लंबी प्रतीक्षा सूची चल रही है। बालोतरा, पाली. जालोर, सिरोही, जोधपुर और बीकानेर क्षेत्र से कर्नाटक जाने वाले यात्रियों को सीट नहीं मिल रही, जिससे उनकी परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
साप्ताहिक ट्रेनों पर भारी दबाव, एक ही दिन में भर जाती हैं सीटें
इस मार्ग की प्रमुख ट्रेनों में एक बाड़मेर-यशवंतपुर वातानुकूलित एक्सप्रेस सप्ताह में केवल एक दिन चलती है। मई के पूरे महीने में बालोतरा से हुब्बल्ली तक तृतीय और द्वितीय वातानुकूलित श्रेणी में टिकट उपलब्ध नहीं है, जबकि जून की शुरुआत में भी लंबी प्रतीक्षा सूची बनी हुई है। इसी तरह जोधपुर-केएसआर बेंगलूरु एक्सप्रेस और बीकानेर-यशवंतपुर एक्सप्रेस में भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। कई तिथियों पर लम्बी प्रतीक्षा सूची है, जिससे यात्रियों के लिए टिकट पाना बेहद मुश्किल हो गया है।
कर्नाटक से राजस्थान लौटना भी कठिन, हर ओर प्रतीक्षा सूची
स्थिति केवल एक तरफ की नहीं है। कर्नाटक से राजस्थान लौटने वाले यात्रियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यशवंतपुर-बाड़मेर वातानुकूलित एक्सप्रेस में हुब्बल्ली से बालोतरा के लिए लगातार प्रतीक्षा सूची चल रही है। इससे यात्रियों की पहले से तय योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
यात्रियों की मजबूरी: बदलना पड़ रहा मार्ग, बढ़ रहा खर्च
टिकट नहीं मिलने से यात्रियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तत्काल टिकट पर निर्भरता बढ़ गई है। दो या अधिक ट्रेनों से यात्रा करनी पड़ रही है। कई यात्रियों को बस या हवाई यात्रा का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे यात्रियों का समय और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं।
रेल के फेरे बढ़ाने की मांग तेज
प्रवासी समुदाय ने रेलवे से इस मार्ग पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की मांग की है। प्रवासियों का कहना है कि साप्ताहिक ट्रेनों के कारण समस्या और बढ़ जाती है। गर्मियों के दौरान अतिरिक्त विशेष ट्रेनें चलाने और मौजूदा ट्रेनों के फेरे बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
छुट्टियां, विवाह और धार्मिक आयोजन से बढ़ा दबाव
आंजणा पटेल समाज सेवा संघ, हुब्बल्ली-धारवाड़ के पूर्व अध्यक्ष दूदाराम चौधरी थोब कहते हैं, इस भीड़ के पीछे प्रमुख कारण स्कूल और कालेज की गर्मी की छुट्टियां, राजस्थान में मई में विवाह समारोहों की अधिकता और विभिन्न धार्मिक आयोजन होना है। कर्नाटक के बेंगलूरु, हुब्बल्ली सहित कई शहरों में रहने वाले राजस्थान मूल के लोग बड़ी संख्या में अपने गृह क्षेत्रों में गए हैं, जिससे ट्रेनों पर अचानक दबाव बढ़ गया है। बाड़मेर-यशवंतपुर वातानुकूलित एक्सप्रेस सप्ताह में केवल एक दिन चलती है, जो पर्याप्त नहीं है। इसे सप्ताह में दो या तीन दिन किया जाना चाहिए। इसके साथ ही गर्मियों के दौरान अधिक विशेष ट्रेनें चलाई जाएं और जरूरत के अनुसार ट्रेनों के फेरे बढ़ाए जाएं, ताकि प्रवासियों को आने-जाने में राहत मिल सके।