कृषि अभियांत्रिकी विभाग अपने कौशल विकास केंद्र के लिए जमीन की तलाश कर रहा था। इसी कड़ी में विभाग ने कृषि कॉलेज से रिंग रोड पर अनुपयोगी जमीन की मांग की। कॉलेज ने पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय के पास सर्वे नंबर 260 की जमीन से पौन दो एकड़ जमीन कृषि अभियांत्रिकी को दे दी। 30 मार्च 2015 को अधिकारिक तौर पर जमीन हस्तांतरण पूरा हुआ। इसमें कॉलेज प्रबंधन ने विभाग के लिए कुछ शर्तें निर्धारित की।
कॉलेज के जिम्मेदारों की कृपा यहीं खत्म नहीं हुई। उन्होंने अभियांत्रिकी विभाग की अनुपयोगी जमीन की मांग पर कॉलेज की उपयोगी जमीन दे दी। कॉलेज से मिली जानकारी के मुताबिक कॉलेज ने रिंग रोड पर वह जमीन दी, जहां बड़े पैमाने पर प्रजनक बीजों का उत्पादन होता था। कृषि फॉर्म के पूर्व प्रभारी मुकेश सक्सेना की माने तो उक्त जमीन पर 12 से 15 क्विंटल सोयाबीन और चने के प्रजनक बीज तैयार होते थे। इन बीजों से एजेंसियां 100 गुना बीज तैयार कर किसानों को उपलब्ध करवाती थी।
14 मई 2015 को अभियांत्रिकी विभाग को जमीन का कब्जा देने के दौरान शर्तें तय थी, जितनी जमीन कृषि कॉलेज मुहैया करवा रहा है, उस जमीन के पिछले हिस्से में कृषि कॉलेज की जमीन को सुरक्षित करने के लिए अभियांत्रिकी विभाग बाउंड्रीवॉल बनाएगा। अभियांत्रिकी विभाग ने इस पर सहमति भी दी, लेकिन इस शर्त को विभाग ने पूरा नहीं किया। 6 माह तक विभाग ने बाउंड्रीवॉल नहीं बनाई तो कृषि विभाग ने जमीन का हस्तांंतरण रद्द करने की बजाय स्वयं की शर्तों का उल्लंघन कर दिया। कॉलेज के जिम्मेदारों ने कॉलेज के राजकोष में सेंध लगाई और करीब 40 लाख रुपए की लागत से बाउंड्रीवॉल का निर्माण कर दिया।