
अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों की टीम (पत्रिका फोटो)
Bikaner Kidney Incident: जोधपुर: बीकानेर जिले के पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की किडनी प्रभावित होने के मामलों की जांच के लिए जोधपुर से भेजे गए सात सदस्यीय विशेषज्ञ दल ने अपनी अब तक की प्रारंभिक रिपोर्ट में इसे कोटा जैसे सामूहिक संक्रमण का मामला मानने से इनकार किया है। जांच दल का मानना है कि अब तक उपलब्ध तथ्यों में किसी एक संक्रमण स्रोत, दवा की खामी या अस्पताल में फैले सामूहिक संक्रमण के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, जिन पांच प्रसूताओं को गंभीर स्थिति में भर्ती किया गया था, उनके अस्पताल में भर्ती होने के समय में करीब 20 दिन का अंतराल था। यदि यह किसी एक स्रोत से फैला संक्रमण या दवा संबंधी गड़बड़ी होती तो मरीजों के सामने आने का समय लगभग एक जैसा होता। यही कारण है कि जांच टीम इस मामले को सामूहिक संक्रमण की श्रेणी में नहीं मान रही है।
चिकित्सकों का कहना है कि प्रसव के बाद गंभीर जटिलताएं कई कारणों से उत्पन्न हो सकती हैं। इनमें अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण, रक्तचाप संबंधी समस्याएं और अन्य चिकित्सकीय जटिलताएं शामिल हैं, जिनसे किडनी प्रभावित हो सकती है। ऐसे मामलों को पूरी तरह असामान्य नहीं माना जाता।
जोधपुर के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ सुरेंद्र सिंह राठौड़ के अनुसार, यहां भी हर महीने दो से तीन ऐसे जटिल मामले सामने आते हैं, जिनमें प्रसव के बाद किडनी पर असर पड़ता है। सोमवार को भी एक महिला को प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव के कारण गंभीर स्थिति में भर्ती किया गया। नेफ्रोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की जटिलताएं प्रसूति चिकित्सा में समय-समय पर सामने आती रहती हैं।
जोधपुर के सबसे बड़े उम्मेद अस्पताल में वर्ष 2011 में 13 प्रसूताओं की मौत का एक बड़ा और गंभीर मामला सामने आया था। जांच में पाया गया कि सप्लायर द्वारा प्रदान किए गए ग्लूकोज के नमूनों में खतरनाक संक्रमण मौजूद था। बाद में राज्य सरकार संबंधित फर्म के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए और उस ग्लूकोज के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया।
Published on:
16 Jun 2026 11:05 am
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