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सिरोही के महेंद्र की दर्दभरी कहानी: 13 साल से चारदीवारी में कैद, 3 बीघा जमीन बिकी फिर भी नहीं हुआ इलाज, अब सरकार से आस

Sirohi Mahendra Story: सिरोही जिले में मानसिक बीमारी से जूझ रहे महेंद्र की जिंदगी पिछले 13 साल से चारदीवारी में कैद है। परिजनों के अनुसार, वह उन्हें देखते ही आक्रामक हो जाता है और कई बार पिता पर भी हमला कर चुका है।

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Sirohi Mahendra mental illness

मानसिक रोग से ग्रसित महेंद्र कुमार (पत्रिका फोटो)

Sirohi Mahendra mental illness: नागाणी (सिरोही): सनवाड़ा में एक परिवार पिछले 13 साल से दर्द और बेबसी भरी जिंदगी जीने को मजबूर है। मानसिक रोग से ग्रसित महेंद्र कुमार करीब 13 साल से घर की चारदीवारी के भीतर रहने को विवश है। परिजनों का कहना है कि कई लाख रुपए खर्च करने के बावजूद उसके स्वास्थ्य में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। आर्थिक तंगी के चलते उपचार भी बंद हो चुका है। ऐसे में परिवार को अब सरकार से मदद की आस है।

परिजनों के अनुसार, महेंद्र की मानसिक स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि वह कई बार अपने माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों पर हमला करने का प्रयास करता है। इसी डर के कारण माता-पिता भी उसके सामने आने से कतराते हैं, जिस घर में कभी पूरा परिवार साथ रहता था, वहां आज भय का माहौल बना हुआ है।

गुजरात तक कराया उपचार, नहीं हुआ ठीक

पिता रमेश राणा ने बताया कि महेंद्र ने पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। इसके बाद वह मजदूरी करने गुजरात चला गया। वहां अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। नाक से खून आने और खून की उल्टियां होने के बाद वह मानसिक तनाव में रहने लगा। धीरे-धीरे उसकी मानसिक स्थिति लगातार खराब होती चली गई।

परिजनों ने पालनपुर, सिरोही और उदयपुर सहित कई स्थानों पर उसका उपचार कराया। इलाज पर कई लाख रुपए खर्च हुए। करीब तीन बीघा जमीन भी बेचनी पड़ी, लेकिन स्थिति में कोई खास सुधार नहीं हुआ। आर्थिक हालात कमजोर होने के बाद इलाज बीच में ही रुक गया।

बीमारी का जिक्र करते ही मां हुई भावुक

महेंद्र की माता सजना देवी बेटे की बीमारी का जिक्र करते ही भावुक हो उठती हैं। उन्होंने बताया कि समय पर उचित इलाज नहीं मिलने और आर्थिक तंगी के कारण बेटे की हालत लगातार बिगड़ती चली गई। अब परिवार लोगों से मदद लेकर किसी तरह गुजर-बसर कर रहा है।

परिजनों के अनुसार, महेंद्र कई बार आक्रामक हो जाता है और हमला करने का प्रयास करता है। घर के आंगन में वह दिन-रात एक ही स्थान पर चक्कर लगाता रहता है, जिससे वहां रास्ते जैसा निशान बन गया है।

डर के साये में जी रहा परिवार

महेंद्र के दो भाई भी हैं, लेकिन हमले के डर से वे उसके साथ नहीं रह पाते। माता-पिता गुजरात में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। गांव स्थित घर में अब लोग आने से भी कतराते हैं।

परिजनों का कहना है कि आज तक किसी प्रकार की सरकारी सहायता या विशेष चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाई है। ऐसे में वे जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विभाग से मदद की गुहार लगा रहे हैं, ताकि महेंद्र का फिर से इलाज शुरू हो सके और परिवार सामान्य जीवन जी सके।

इनका कहना है

मानसिक रोग से ग्रसित युवक के घर जाकर उसकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया जाएगा। आवश्यकतानुसार उसे उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर कर उपचार की व्यवस्था करवाई जाएगी।
-डॉ. सुमेर सिंह भाटी, ब्लॉक मुख्य चिकित्सा अधिकारी, रेवदर