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उदयपुर में गरीबों के राशन पर डाका: डीलर ने गेहूं के बदले प्याज लेने का बनाया दबाव, लाइसेंस निलंबन और FIR की मांग

Udaipur News: उदयपुर जिले में झाड़ोल उपखंड के तहत आने वाले माणस गांव में राशन डीलर पर गेहूं के बदले प्याज लेने का दबाव बनाने और राशन में हेराफेरी के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने लाइसेंस निलंबन, एफआईआर और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

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Udaipur Ration Scam

झाड़ोल एरिया के माणस में स्थित उचित मूल्य की दुकान (पत्रिका फोटो)

Udaipur Jhadol Ration Scam: झाड़ोल (उदयपुर): सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली पर झाड़ोल उपखंड क्षेत्र के माणस गांव से गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां उचित मूल्य दुकान संचालक पर गरीब उपभोक्ताओं के हक के गेहूं में कथित हेराफेरी, गेहूं के बदले प्याज खरीदने का दबाव बनाने और राशन वितरण में मनमानी करने के आरोप लगे हैं। मामले ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है और ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि राशन डीलर पन्नालाल पटेल की ओर से उपभोक्ताओं को निर्धारित गेहूं देने के बजाय 20 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से प्याज लेने के लिए मजबूर किया जाता है। विरोध करने पर राशन नहीं देने, डराने-धमकाने और घंटों चक्कर कटवाने के आरोप भी सामने आए हैं।

शिकायतकर्ता श्यामलाल कटारा निवासी सैलाणा ने खाद्य विभाग को दी शिकायत में बताया कि दो महीने के राशन के तहत मिलने वाले 30 किलोग्राम गेहूं के स्थान पर उसे प्याज लेने के लिए कहा गया। जब उसने मना किया तो कथित रूप से उसे गेहूं के बदले नकद राशि लेकर मामला खत्म करने को कहा। काफी विवाद के बाद उसे केवल 15 किग्रा. गेहूं देकर रवाना कर दिया गया, जबकि शेष राशन रोक लिया गया।

अनपढ़ और गरीब उपभोक्ता बन रहे निशाना

ग्रामीणों का आरोप है कि राशन डीलर विशेष रूप से अनपढ़ और गरीब परिवारों को निशाना बनाकर उनके हिस्से के गेहूं में अधिक हेराफेरी करता है। कई उपभोक्ताओं ने दावा किया कि उनसे भी गेहूं के बजाय प्याज या नकद राशि लेने का दबाव बनाया गया। विरोध करने वालों को डराने और राशन रोकने की धमकी दी जाती है।

वीडियो और शिकायतों से बढ़ा मामला

घटना से जुड़े वीडियो और लिखित शिकायतें सामने आने के बाद मामला पूरे झाड़ोल क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह गरीबों के खाद्यान्न पर सीधा डाका और सरकारी व्यवस्था के साथ बड़ा खिलवाड़ है।

प्रशासन की कार्यशैली पर भी उठे सवाल

ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि लंबे समय से ऐसी शिकायतें सामने आ रही थीं तो खाद्य विभाग और प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौन बने हुए हैं, जिससे राशन माफिया और डीलरों के हौसले बुलंद हो रहे हैं।

लाइसेंस निलंबन और एफआईआर की मांग

ग्रामीणों और राशन कार्ड धारकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर राशन डीलर का लाइसेंस तत्काल निलंबित करने, एफआईआर दर्ज करने तथा गरीबों को बकाया राशन दिलाने की मांग की है।

ये रहे बड़े सवाल

  • क्या गरीबों के हिस्से का गेहूं खुलेआम प्याज और पैसों के बदले बदला जा रहा है?
  • क्या खाद्य विभाग इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा या फिर गरीबों का हक यूं ही लूटता रहेगा?

फिलहाल, पूरे क्षेत्र की निगाहें प्रशासन और खाद्य विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

इनका कहना है…

मैं उचित मूल्य की दुकान माणस सेंटर पर दो महीने का 30 किलोग्राम गेहूं लेने गया था। वहां डीलर ने कहा कि गेहूं उपलब्ध नहीं है और प्याज लेने होंगे। जब मैंने मना किया तो उसने डराने-धमकाने की कोशिश की। मैंने छोटे बच्चों का हवाला देते हुए गेहूं देने की गुहार लगाई। करीब दो घंटे तक हाथ जोड़कर विनती करने के बाद डीलर ने केवल 15 किलोग्राम गेहूं ही दिया।
-श्यामलाल कटारा, निवासी सैलाणा, पीड़ित उपभोक्ता

राशन डीलर की ओर से गेहूं के बजाय प्याज देने का मामला सामने आया है। अगर ऐसा हुआ है तो गलत है। मामले की जांच के लिए कल ही टीम भेजकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उपभोक्ता के साथ इस तरह का व्यवहार किया जाता है तो डीलर को बख्शा नहीं जाएगा।
-मनीष भटनागर, जिला रसद अधिकारी, उदयपुर