
देवगढ़. राजस्थान का नाम सुनते ही जहां आमतौर पर आंखों के सामने रेतीले धोरे, किले और शाही महल की तस्वीर उभरती है, वहीं मेवाड़ और मारवाड़ की सीमा पर अरावली की गोद में बसा गोरमघाट इस पहचान को एक नई खूबसूरती दे रहा है। राजसमंद जिले के देवगढ़ उपखंड के समीप स्थित यह प्राकृतिक स्वर्ग मानसून में ऐसा निखर उठा है कि यहां की वादियां हिमाचल, उत्तराखंड और कश्मीर का अहसास करा रही हैं। इसी कारण इसे ‘राजस्थान का कश्मीर’ भी कहा जाने लगा है।
ऐतिहासिक ट्रेन सफर बना रोमांच की पहचान
गोरमघाट की सबसे बड़ी खासियत है ब्रिटिशकालीन मीटर गेज रेलवे लाइन पर होने वाला रोमांचकारी सफर। हेरिटेज और लोकल ट्रेनें यात्रियों को अरावली के घने जंगलों, गहरी घाटियों और ऊंचे पुलों के बीच से गुजारते हुए प्रकृति का अनोखा अनुभव कराती हैं। सफर का सबसे रोमांचक नजारा तब देखने को मिलता है, जब ट्रेन घुमावदार यू-शेप रेलवे ट्रैक से गुजरती है। एक ही पल में यात्री ट्रेन के दोनों छोर और चारों ओर फैली हरियाली को देखकर रोमांचित हो उठते हैं।
बारिश ने पहाड़ों को पहनाई हरी चादर
मानसून की मेहरबानी से गोरमघाट के पहाड़ हरी चादर ओढ़ चुके हैं। जगह-जगह गिरते झरने, बादलों से ढकी घाटियां और ठंडी हवाएं यहां आने वालों को किसी हिल स्टेशन जैसा अनुभव करा रही हैं। शनिवार-रविवार को बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं, जिससे स्थानीय पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिली है।
प्रकृति प्रेमियों की पहली पसंद
अरावली की वादियों से गुजरता देश का खूबसूरत मीटर गेज सफर, दूधिया झरने, घने जंगल और यू-शेप रेलवे ट्रैक अब पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुके हैं। सेल्फी और रील्स के दौर में गोरमघाट युवाओं की भी पहली पसंद बनता जा रहा है।
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अरावली की वादियों में बसा गोरमघाट मानसून में बना प्रकृति का स्वर्ग, जहां झरने, बादल और ऐतिहासिक ट्रेन सफर दे रहे हैं हिल स्टेशन जैसा रोमांच।
फोटो : सरफराज अहमद, ड्रोन सहयोग गणपत सिंह काछबली
Updated on:
05 Aug 2026 06:00 am
Published on:
05 Aug 2026 06:00 am
