3 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

राजस्थान में तैयार देश की पहली ‘हाई-स्पीड टेस्टिंग लैब’, 250 KM/H की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें, जानिए क्या होंगे फायदे?

India First Rail Test Track: : जोधपुर मंडल के गुढ़ा-ठठाना मीठड़ी के बीच बनकर तैयार, देश की पहली हाई स्पीड टेस्टिंग लैब, 250 की रफ्तार में दौड़ेंगी ट्रेन
2 min read
Google source verification
India First High Speed Railway Test Track Jodhpur Division Rajasthan 2026

India First High Speed Railway Test Track - AI PIC

भारतीय रेलवे के इतिहास में राजस्थान एक नया और स्वर्णिम अध्याय लिखने जा रहा है। उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल अंतर्गत गुढ़ा-ठठाना मीठड़ी के बीच 967.07 करोड़ रुपये की लागत से देश का पहला 64 किलोमीटर लंबा 'हाई-स्पीड टेस्ट ट्रैक' बन रहा जिसका लगभग 95 प्रतिशत हिस्सा बनकर तैयार हो चुका है। सबसे खास बात यह है कि इस टेस्ट ट्रैक को मुख्य रेल नेटवर्क से भी सफलतापूर्वक जोड़ दिया गया है। आगामी दिवाली के त्यौहार के बाद यहां 250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली हाई-स्पीड ट्रेनों और रोलिंग स्टॉक का पहला आधिकारिक ट्रायल शुरू कर दिया जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), एडवांस सेंसर्स और हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों से लैस यह ट्रैक भारतीय रेलवे के लिए एक अत्याधुनिक 'ओपन लैब' की तरह काम करेगा, जो भविष्य की तेज रफ्तार ट्रेनों की सुरक्षा और क्षमता तय करेगा।

AI और कैमरों की निगरानी

इस हाई-स्पीड टेस्ट ट्रैक की सबसे बड़ी यूएसपी (USP) इसकी तकनीकी क्षमता है। ट्रायल के दौरान ट्रेन के गुजरते ही सिस्टम पल-पल की जानकारी जुटाएगा। ट्रैक पर बिछाए गए उन्नत सेंसर्स, हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और डेटा रिकॉर्डिंग सिस्टम हर सेकंड लाखों आंकड़े जुटाएंगे।

एआई और एडवांस एनालिटिक्स इन आंकड़ों का तुरंत विश्लेषण करेंगे। ट्रेन की स्थिरता, व्हील-रेल इंटरैक्शन, ब्रेकिंग क्षमता, एयरो-डायनामिक्स, पेंटोग्राफ परफॉर्मेंस, वाइब्रेशन, शोर और पुलों पर पड़ने वाले दबाव का सटीक आकलन किया जाएगा।

एक ही ट्रैक पर होंगे दर्जनों परीक्षण

इस 64 किलोमीटर लंबे परीक्षण नेटवर्क को विभिन्न प्रकार की टेस्टिंग आवश्यकताओं के आधार पर डिजाइन किया गया है।

मुख्य लाइन: 23 किलोमीटर की मेन टेस्टिंग लाइन।

हाई-स्पीड लूप: 13 किलोमीटर का हाई-स्पीड लूप।

कर्व टेस्टिंग लूप: मोड़ पर ट्रेन की स्थिरता जांचने के लिए 20 किलोमीटर का कर्व लूप।

एक्सीलेरेटेड टेस्टिंग लूप: त्वरित गति परीक्षण के लिए 3 किलोमीटर का विशेष लूप।

पुल और स्टेशन: इस पूरी परियोजना में 7 बड़े पुल, 129 छोटे पुल और 4 नए स्टेशन शामिल किए गए हैं।

तकनीकी परीक्षण: यहां ट्रेन डायनेमिक्स, व्हील ऑफलोडिंग, ट्रैक्शन, बोगी रोटेशन, सिग्नलिंग सिस्टम और एक्सीडेंट प्रिवेंशन क्षमता जैसे दर्जनों परीक्षण किए जाएंगे।

'मेक इन इंडिया' को उड़ान, विदेशी निर्भरता खत्म !

अब तक भारत को अपनी नई हाई-स्पीड ट्रेनों, वंदे भारत के नए मॉडल्स और बोगियों के अंतरराष्ट्रीय मानकों पर परीक्षण के लिए विदेशी टेस्ट ट्रैक्स और सुविधाओं पर निर्भर रहना पड़ता था, जिसमें भारी विदेशी मुद्रा और समय खर्च होता था। इस प्रोजेक्ट के चालू होने से-

भारत की विदेशी सुविधाओं पर निर्भरता पूरी तरह खत्म होगी।

'मेक इन इंडिया' (Make in India) पहल को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।

राजस्थान रेलवे रिसर्च, टेस्टिंग और इनोवेशन के क्षेत्र में एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभरेगा।

दिवाली के बाद ट्रायल, साल के अंत तक काम पूरा

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, मुख्य रेल लाइन से जुड़ने के बाद अब केवल अंतिम चरण का काम चल रहा है। दिवाली के तुरंत बाद इस ट्रैक पर पहली बार टेस्ट ट्रेनें दौड़ती नजर आएंगी। तय समय सीमा के अनुसार काम पूरा होने पर इस साल के अंत तक इस रेलवे प्रयोगशाला को पूरी तरह से देश को समर्पित कर दिया जाएगा।